260 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 20 पदकों में 13 पर छात्राओं ने जमाया कब्जा; युवाओं से संविधान और न्याय के मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। विश्वविद्यालय परिसर स्थित आंबेडकर ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान मेधावी विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया।
2017 से पहले माफिया के प्रभाव का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून के शासन के बजाय माफिया का प्रभाव था। उनकी सरकार ने प्रदेश में ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून का शासन स्थापित करने की दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा कि कानून और संविधान से ऊपर कोई व्यक्ति या पद नहीं हो सकता। कानून का शासन मजबूत होने से प्रदेश में विकास और निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार हुआ है।
सीएम योगी ने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि अन्याय के सामने चुप रहना उचित नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य के मार्ग पर चलने, सिद्धांतों पर अडिग रहने और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि किसी भी दबाव में गलत कार्यों का समर्थन नहीं करना चाहिए।
संविधान और न्याय के प्रति जिम्मेदारी का संदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तारीख भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण है। उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना के फैसले का संदर्भ देते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया निर्णय इतिहास में अपनी जगह बनाता है। युवा अधिवक्ताओं को संविधान की भावना के अनुरूप काम करना चाहिए और न्याय व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन करने, अपनी जड़ों से जुड़े रहने और समाज की समस्याओं के समाधान में योगदान देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों जैसे मामलों के समाधान में युवा वकील महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
छात्राओं ने पदक तालिका में बनाई बढ़त
दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को कुल 20 पदक प्रदान किए गए। इनमें 13 पदक छात्राओं और सात पदक छात्रों को मिले। बीए एलएलबी (ऑनर्स) पाठ्यक्रम में तेजस्विनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला।
एलएलएम पाठ्यक्रम में रूपल जायसवाल ने स्वर्ण, चित्रा सिंह ने रजत और सौम्या गिरी ने कांस्य पदक हासिल किया। बौद्धिक संपदा अधिकार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में भी स्वर्ण और कांस्य पदक छात्राओं के नाम रहे।
युवाओं से समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान की अपील
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अनुशासन, सत्यनिष्ठा और सीखने की निरंतर इच्छा बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं की जिम्मेदारी केवल पेशेवर सफलता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उन्हें समाज में न्याय और संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान देना चाहिए।
समारोह में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित किया गया। डिग्रियां और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह अवसर उनकी मेहनत और उपलब्धियों की औपचारिक पहचान का प्रतीक रहा।




