भाजपा नेता रमेश यादव के फार्म हाउस में 32 लाख रुपये की लूट का मामला, पुलिस सात संदिग्धों से कर रही पूछताछ; घटनाक्रम को लेकर कई सवाल भी उठे
भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश मंत्री रमेश यादव के फार्म हाउस में हुई लाखों रुपये की लूट के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल से घटना की जानकारी लेकर जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए। वहीं, मामले में लापरवाही के आरोपों के बीच सेन पश्चिम पारा थाना प्रभारी प्रदीप कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। लूट की वारदात का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस की आठ टीमें लगाई गई हैं।
पुलिस के मुताबिक, घटना सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र के नेवरी गांव में हुई। यहां बदमाशों ने रमेश यादव को उनके ही फार्म हाउस में बंधक बनाकर नकदी और कीमती आभूषण लूट लिए। लूटी गई संपत्ति की कुल कीमत करीब 32 लाख रुपये बताई गई है। मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने के बाद पुलिस पर जल्द से जल्द मामले का खुलासा करने का दबाव बढ़ गया है।
नकाबपोश बदमाशों ने हथियारों के बल पर की लूट
बताया गया है कि दो नकाबपोश बदमाश फार्म हाउस के पीछे की दीवार फांदकर अंदर दाखिल हुए। आरोप है कि उन्होंने तमंचे और चाकू के बल पर रमेश यादव को काबू में कर उनके हाथ-पैर बांध दिए और मुंह पर टेप लगा दिया। इसके बाद बदमाशों ने उनके सोने की चेन, कड़ा, अंगूठी और राडो कंपनी की घड़ी लूट ली।
बदमाश बेडरूम में रखी अलमारी से करीब 12 लाख रुपये नकद भी ले गए। वारदात को अंजाम देने के बाद उन्होंने रमेश यादव को बाथरूम में बंद कर दिया और पीछे की दीवार फांदकर फरार हो गए। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
सात संदिग्धों से पूछताछ, 35 हजार से अधिक मोबाइल नंबर जांच के दायरे में
लुटेरों तक पहुंचने के लिए पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय अपराधियों के रिकॉर्ड की मदद ले रही है। पुलिस ने सात संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाने के लिए बीटीएस डंप का विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया में 35 हजार से अधिक मोबाइल नंबर सामने आए हैं। इनमें उन नंबरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है, जो घटना के समय संबंधित क्षेत्र में सक्रिय थे और जिनकी गतिविधियां जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं। पुलिस आसपास के इलाकों के दो दर्जन से अधिक संदिग्ध अपराधियों के रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।
जांच का दायरा फार्म हाउस में काम करने वाले सेवादारों और निजी सुरक्षा कर्मियों तक भी बढ़ाया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बदमाशों को फार्म हाउस की गतिविधियों और वहां रखी नकदी के बारे में कोई जानकारी थी या नहीं।
घटना के समय और फोन कॉल को लेकर उठे सवाल
लूटकांड की जांच के दौरान घटनाक्रम के समय को लेकर कुछ सवाल भी सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बदमाशों ने रात करीब 11:37 बजे वारदात को अंजाम दिया। बताया गया कि इसके लगभग पांच मिनट बाद रमेश यादव ने ग्राम प्रधान राम नरेश यादव को फोन किया। इसके बाद करीब सात मिनट में थाना प्रभारी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए।
इन परिस्थितियों को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि हाथ-पैर बंधे होने और मुंह पर टेप लगे होने के बावजूद रमेश यादव ने इतनी जल्दी खुद को कैसे मुक्त किया और फोन कैसे किया। इसके अलावा, शिकायत ग्राम प्रधान की ओर से दिए जाने को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, इन सवालों के जवाब अभी जांच के जरिए ही स्पष्ट हो सकेंगे। केवल इन परिस्थितियों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
सुरक्षा मांगने के दावे पर भी आया बयान
वारदात के बाद रमेश यादव की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई थी। बताया गया कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से एक दरोगा और चार पुलिसकर्मियों को सुरक्षा में तैनात करने की मांग की थी। हालांकि, रमेश यादव ने बाद में सुरक्षा मांगने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सुरक्षा नहीं मांगी थी और घटना के बाद तैनात किए गए पुलिसकर्मियों को भी हटाने के लिए कहा है।
इस बयान के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आई जानकारी में अंतर दिखाई दिया है। पुलिस की ओर से इस पहलू पर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही पूरा घटनाक्रम सामने आ सकेगा।
जल्द खुलासे के निर्देश, पुलिस पर बढ़ा दबाव
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने मुख्यमंत्री को मामले की जानकारी दिए जाने की पुष्टि की है। थाना प्रभारी के निलंबन के बाद पुलिस की आठ टीमें अलग-अलग पहलुओं पर जांच कर रही हैं। तकनीकी साक्ष्यों, संदिग्धों से पूछताछ और स्थानीय अपराधियों के रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।
अब पुलिस के सामने चुनौती लूटे गए सामान की बरामदगी करने, वारदात में शामिल लोगों की पहचान करने और घटनाक्रम से जुड़े सवालों के स्पष्ट जवाब जुटाने की है। मामले का खुलासा होने के बाद ही लूट की पूरी साजिश और आरोपियों की भूमिका सामने आ सकेगी।




