जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत 112 स्थानों पर होंगे सुधार कार्य, तीखे मोड़, खतरनाक चौराहों और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश के 12 जिलों में सड़क इंजीनियरिंग में सुधार किया जाएगा। जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना के तहत कुल 112 कार्य प्रस्तावित हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रस्ताव पर शासन ने 10.77 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी कर दी है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 28.50 करोड़ रुपये है। लखनऊ के छह विधानसभा क्षेत्रों में इसी महीने से सुधार कार्य शुरू कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
खतरनाक मोड़ों और चौराहों का होगा सुधार
योजना के तहत दुर्घटना संभावित स्थानों का अध्ययन कर सुधार कार्य तय किए गए हैं। तीखे मोड़ों पर सड़क की चौड़ाई बढ़ाने और सामने से आने वाले वाहनों की दृश्यता बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आमने-सामने की टक्कर की आशंका कम करना है।
जहां जरूरत होगी, वहां वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर के बजाय रंबल स्ट्रिप लगाई जाएंगी। वाहन चालकों को पहले से सतर्क करने के लिए संकेतक लगाए जाएंगे। प्रमुख जंक्शनों पर ट्रैफिक सिग्नल, रोटरी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी विकसित की जाएंगी।
बिजली के खंभे हटेंगे, लेन मार्किंग होगी स्पष्ट
सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे और अन्य बाधाएं कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। ऐसे स्थानों पर जरूरत के अनुसार खंभों को स्थानांतरित किया जाएगा। सड़क की चौड़ाई बढ़ाने, लेन की स्पष्ट मार्किंग करने और डिवाइडर कट को नियंत्रित करने जैसे कार्य भी किए जाएंगे, ताकि यातायात सुचारु रहे और वाहनों के टकराने की आशंका घटे।
लखनऊ के छह विधानसभा क्षेत्रों में होंगे काम
लखनऊ में प्रस्तावित प्रमुख सुधार स्थलों में शामिल हैं:
- बख्शी का तालाब: पार्श्वनाथ सिटी कट, पैकरामऊ-कुर्सी रोड और आईआईएम चौराहा।
- लखनऊ उत्तर: कुर्सी-महमूदाबाद मार्ग पर विवेकानंद अस्पताल के पास और सीतापुर रोड स्थित रेलवे क्रॉसिंग के आसपास।
- सरोजनीनगर: आलमबाग चौराहे का सुधार।
- लखनऊ कैंट: ओल्ड वीआईपी मार्ग पर फतेह अली चौराहा।
- लखनऊ पूर्व: हुसड़िया चौराहा।
इन स्थानों पर यातायात की स्थिति और दुर्घटना की आशंका को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
छह महीने में पूरे करने होंगे कार्य
शासन ने संबंधित जिलों के पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शासनादेश जारी होने के छह महीने के भीतर सभी निर्धारित सुधार कार्य पूरे किए जाएं। निर्माण और सुधार के दौरान मानकों तथा गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने की जिम्मेदारी विभाग की होगी।
योजना का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा सड़कों की खामियों को दूर कर दुर्घटनाओं की आशंका कम करना भी है। प्रस्तावित कार्य पूरे होने के बाद दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में यातायात को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।




