नौबस्ता में बिना कारोबार के कागजों पर दिखाया लेन-देन, जांच में मौके पर नहीं मिली कंपनी; राज्य कर विभाग की शिकायत पर पुलिस ने शुरू की जांच
नौबस्ता क्षेत्र में बिना वास्तविक कारोबार किए कागजों पर फर्जी कंपनी संचालित कर सरकार से 8.57 करोड़ रुपये से अधिक की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) हासिल करने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की शिकायत पर याशमीन ट्रेडर्स की मालकिन याशमीन के खिलाफ नौबस्ता थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। विभाग का आरोप है कि फर्जी बिल और दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन दर्शाकर अनुचित टैक्स लाभ लिया गया।
ऑनलाइन जांच में सामने आया मामला
राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त कुमार आनंद के मुताबिक, ऑनलाइन समीक्षा के दौरान कंपनी के लेन-देन में अनियमितताओं का पता चला। इसके बाद विभागीय टीम ने कंपनी के पंजीकृत पते बुद्धपुर मछरिया पर पहुंचकर जांच की, लेकिन वहां कोई दुकान या कारोबार संचालित होता नहीं मिला।
जांच के दौरान मकान मालिक ने बताया कि संबंधित दुकान करीब चार महीने पहले ही खाली करा दी गई थी। इसके बावजूद सरकारी पोर्टल पर कंपनी का कारोबार जारी दिखाया जा रहा था। विभाग को संदेह है कि वास्तविक खरीद-बिक्री के बिना ही फर्जी बिलों के आधार पर टैक्स छूट का लाभ लिया गया।
सीमेंट और एल्युमीनियम स्क्रैप के कारोबार के नाम पर पंजीकरण
विभागीय जानकारी के अनुसार, याशमीन ट्रेडर्स ने 23 दिसंबर 2024 को सीमेंट और एल्युमीनियम स्क्रैप की खरीद-बिक्री के नाम पर जीएसटी पंजीकरण कराया था। जांच में सामने आया कि कंपनी की ओर से वास्तविक कारोबार के प्रमाण नहीं मिले, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के दौरान करोड़ों रुपये का लेन-देन दर्ज किया गया।
सरकारी खजाने को 8.57 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
राज्य कर विभाग के अनुसार, कथित फर्जी लेन-देन के आधार पर कंपनी ने 8,57,31,022.32 रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया। विभाग का आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल टैक्स देनदारी चुकाने में किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि कंपनी की मालकिन को अपना पक्ष रखने और कारोबार से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया था। हालांकि, विभाग के मुताबिक वह न तो पेश हुईं और न ही मांगे गए दस्तावेज जमा किए।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू
राज्य कर विभाग की शिकायत के बाद नौबस्ता पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच सब-इंस्पेक्टर संग्राम सिंह यादव को सौंपी गई है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, कंपनी के दस्तावेजों और कथित लेन-देन की जांच करेगी। जांच के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।




