करीब दो लाख लोगों को कटौती और लो-वोल्टेज से राहत मिलने की उम्मीद, कई उपकेंद्रों पर 5-5 एमवीए के अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने की तैयारी
दीपावली के त्योहार से पहले राजधानी में बिजली आपूर्ति बेहतर बनाने के लिए लेसा ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शहर के नादरगंज, कबीर नगर, अमेठी, दुबग्गा आम्रपाली और माल उपकेंद्रों पर पावर ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। इस काम से करीब दो लाख लोगों को बार-बार होने वाली बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। क्षमता बढ़ने से त्योहार के दौरान बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
पांच उपकेंद्रों पर लगाए जाएंगे नए ट्रांसफार्मर
लेसा के अनुसार, कानपुर रोड स्थित नादरगंज उपकेंद्र में पहले से 10-10 एमवीए क्षमता के तीन पावर ट्रांसफार्मर लगे हैं। यहां पांच एमवीए का एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाया जाएगा। कबीर नगर उपकेंद्र की मौजूदा क्षमता 20 एमवीए है, जहां भी पांच एमवीए का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा।
इसी तरह माल उपकेंद्र में 10-10 एमवीए के ट्रांसफार्मर लगे हैं। यहां पांच एमवीए की अतिरिक्त क्षमता जोड़ी जाएगी। दुबग्गा आम्रपाली उपकेंद्र में भी पांच एमवीए का नया ट्रांसफार्मर लगाया जा रहा है। वहीं, अमेठी उपकेंद्र में मौजूदा पांच एमवीए क्षमता के अतिरिक्त पांच एमवीए का एक और ट्रांसफार्मर लगाने की योजना है।
चार उपकेंद्रों पर पूरा हो चुका है काम
बिजली आपूर्ति सुधारने के लिए लेसा कुछ अन्य उपकेंद्रों पर क्षमता वृद्धि का काम पहले ही पूरा कर चुका है। एफसीआई उपकेंद्र की क्षमता 25 एमवीए से बढ़ाकर 30 एमवीए कर दी गई है। पुरनपुर उपकेंद्र में आठ एमवीए का नया ट्रांसफार्मर लगाए जाने से इसकी कुल क्षमता 18 एमवीए हो गई है।
इसके अलावा इंद्रलोक और उतरेठिया उपकेंद्रों पर पांच-पांच एमवीए के नए ट्रांसफार्मर चालू किए जा चुके हैं। इन बदलावों से संबंधित क्षेत्रों में बिजली की मांग के अनुरूप आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
ओवरलोडिंग कम होने से सुधरेगी आपूर्ति
लेसा अमौसी जोन के मुख्य अभियंता राम कुमार ने बताया कि उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पांच उपकेंद्रों पर ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। इससे ओवरलोडिंग की समस्या कम होगी और बिजली कटौती व कम वोल्टेज की शिकायतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
त्योहारों के दौरान घरों और बाजारों में बिजली की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाने की यह कवायद आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।




