वाराणसी। पूर्वांचल में टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में वाराणसी में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। मिर्जामुराद के खोचवां क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के पास स्थापित अरविंद लिमिटेड के गारमेंट प्लांट का रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया। करीब सात एकड़ में फैले इस प्लांट को लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने और स्थानीय स्तर पर गारमेंट उद्योग को गति मिलने की उम्मीद है।
इस प्लांट की खास बात यह है कि यहां 1,000 से अधिक महिलाओं और युवतियों को रोजगार देने की योजना है। फैशन डिजाइनिंग और तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली युवतियों के लिए यह अपने ही क्षेत्र में काम करने और अनुभव हासिल करने का बड़ा अवसर बन सकता है। अब तक बेहतर रोजगार की तलाश में कई युवतियों को अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और लुधियाना जैसे औद्योगिक शहरों का रुख करना पड़ता था।


महिलाओं से मिले प्रधानमंत्री, काम और सपनों के बारे में जाना
उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लांट में तैयार कपड़ों और अरविंद लिमिटेड के उत्पादों की प्रदर्शनी देखी। उन्होंने उत्पादन की प्रक्रिया को समझने के साथ वहां काम करने वाली महिलाओं से बातचीत भी की। प्रधानमंत्री ने महिलाओं से उनके प्रशिक्षण, काम के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी ली।
इस दौरान प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी करीब 300 महिलाओं से भी प्रधानमंत्री ने मुलाकात की। उन्होंने महिलाओं से पूछा कि काम सीखने के दौरान उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और वे आगे अपने करियर को किस दिशा में ले जाना चाहती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
नौकरी तक सीमित न रहें, अपना कारोबार शुरू करें
प्रधानमंत्री ने महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रोजगार देने वाला बनने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को प्रशिक्षण लेकर अपने कौशल को निखारने, अनुभव हासिल करने और भविष्य में खुद की इंडस्ट्री स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने उद्यम शुरू करने के इच्छुक लोगों को बैंकिंग सहायता और ऋण जैसे विकल्पों का लाभ उठाने की दिशा में भी प्रेरित किया। प्रधानमंत्री का संदेश था कि लगातार सीखते रहना और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रयास करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री से बातचीत को महिलाओं ने बताया यादगार पल
प्लांट में काम करने वाली कानपुर की शताक्षी मिश्रा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात को अपने लिए सपने जैसा अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सहज अंदाज में उनका नाम, काम और भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा। शताक्षी ने अपनी खुद की इंडस्ट्री शुरू करने की इच्छा भी जाहिर की। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री ने उन्हें अपने सपने को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
वहीं, क्वालिटी चेक के काम से जुड़ी खुशबू पाल ने बताया कि वह यहां केवल नौकरी करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपना कारोबार शुरू करने के लिए जरूरी अनुभव और विशेषज्ञता हासिल करने आई हैं। उन्होंने भविष्य में गारमेंट उद्योग में प्रबंधकीय भूमिका निभाने और फिर अपनी इंडस्ट्री स्थापित करने की इच्छा जताई। प्रधानमंत्री ने उनके लक्ष्य की सराहना करते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अलका और खुशी श्रीवास्तव सहित अन्य महिलाओं से बातचीत के दौरान भी प्रधानमंत्री ने कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं को निराश न होने और लगातार सीखते रहने का संदेश दिया।
पहले चरण में कई तरह के परिधान तैयार होंगे
अरविंद लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1931 में अहमदाबाद में हुई थी। कंपनी टेक्सटाइल और गारमेंट क्षेत्र में काम करती है। वाराणसी में स्थापित यह प्लांट दो चरणों में विकसित किए जाने की योजना है। पहले चरण में स्पोर्ट्सवेयर, अंडरगारमेंट्स, ह्यूमन प्रोटेक्शन फैब्रिक और खादी से जुड़े परिधान तैयार किए जाएंगे। परियोजना के दूसरे चरण के लिए करीब 600 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव भी बताया गया है।
इस परियोजना से वाराणसी और आसपास के जिलों में संगठित गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से महिलाओं को अपने परिवार के करीब रहकर काम करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, प्रशिक्षण प्राप्त युवतियां उद्योग में काम करते हुए उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अनुभव हासिल कर सकेंगी।
बुनकरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिल सकती है मजबूती
बनारसी सिल्क और हथकरघा उत्पादों के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाली काशी में बड़े स्तर पर गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना को औद्योगिक विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस तरह की परियोजनाओं से स्थानीय आपूर्ति शृंखला, कुशल श्रमिकों और संबंधित व्यवसायों को नए अवसर मिल सकते हैं।
यदि परियोजना के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों को पर्याप्त रोजगार और प्रशिक्षण मिलता है, तो इससे पूर्वांचल में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा काम की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर होने वाले पलायन को कम करने में मदद मिल सकती है। महिला कामगारों के लिए यह पहल नौकरी के साथ-साथ भविष्य में अपना कारोबार शुरू करने की संभावनाएं भी खोल सकती है।




