भाजपा के कोर वोटरों की उदासीनता और युवा मतदाताओं की नाराजगी बनी हार की वजह, जमीनी स्तर पर सपा की सक्रियता आई काम
लखनऊ। लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी कांति सिंह ने भाजपा के इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह को 17,127 मतों से पराजित कर छह साल बाद सीट पर फिर कब्जा जमा लिया। इस जीत से सपा को नई राजनीतिक ऊर्जा मिली है, वहीं भाजपा के लिए यह परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आत्ममंथन का संकेत माना जा रहा है।
नौवें और अंतिम चक्र की मतगणना पूरी होने के बाद कांति सिंह को कुल 56,905 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह के खाते में 39,778 मत आए। सभी नौ चरणों की मतगणना में कांति सिंह ने लगातार बढ़त बनाए रखी। अंतिम परिणाम तक भाजपा प्रत्याशी इस अंतर को पाटने में सफल नहीं हो सके।
भाजपा के परंपरागत वोटरों में दिखी उदासीनता
चुनाव परिणाम के पीछे भाजपा के परंपरागत मतदाताओं की कम भागीदारी को एक प्रमुख वजह माना जा रहा है। वर्ष 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और कोर वोटरों में खासा उत्साह देखने को मिला था। इसी माहौल का लाभ भाजपा प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह को वर्ष 2020 के चुनाव में मिला था।
हालांकि, इस बार मतदान के दौरान पार्टी के समर्थकों में पहले जैसा उत्साह नजर नहीं आया। मतदाता सूची में नाम नहीं होने, मतदान केंद्रों की अधिक दूरी और मतदाता पर्चियां समय पर नहीं पहुंचने जैसी समस्याओं का भी असर देखने को मिला। कई मतदाताओं के मतदान केंद्र 20 से 25 किलोमीटर दूर होने की बात सामने आई। ऐसे में भाजपा के परंपरागत मतदाताओं का एक वर्ग मतदान के लिए घर से नहीं निकला।
युवा मतदाताओं की नाराजगी को भी भाजपा के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव के नतीजों ने संकेत दिया है कि केवल परंपरागत समर्थन के भरोसे चुनाव जीतना आसान नहीं है। मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संगठनात्मक सक्रियता भी महत्वपूर्ण है।
पिछली हार से सबक लेकर कांति सिंह ने बनाई बढ़त
दूसरी ओर, सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने पिछली हार से सबक लेते हुए चुनाव की तैयारी जमीनी स्तर पर की। उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से लेकर मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने तक सक्रिय भूमिका निभाई। मतदान के दिन भी कार्यकर्ता मतदाताओं को घरों से निकालकर मतदान केंद्रों तक पहुंचाने में जुटे रहे।
इस रणनीति का असर मतगणना के दौरान दिखाई दिया। सभी नौ चरणों में कांति सिंह ने अपनी बढ़त बनाए रखी और अंततः 17,127 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इस परिणाम से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है।
2014 में कांति, 2020 में अवनीश को मिली थी जीत
लखनऊ खंड स्नातक सीट पर कांति सिंह और अवनीश कुमार सिंह के बीच मुकाबला पहले भी चर्चा में रहा है। वर्ष 2014 के चुनाव में कांति सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरी थीं और उन्होंने अवनीश सिंह को 6,403 मतों से हराया था।
वर्ष 2020 के चुनाव में अवनीश कुमार सिंह ने पलटवार करते हुए कांति सिंह को 6,403 वोटों के अंतर से पराजित कर दिया था। उस चुनाव में कांति सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। अब वर्ष 2026 के चुनाव में उन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर पिछली हार का हिसाब बराबर कर लिया है।
लखनऊ खंड स्नातक सीट पर सपा की यह जीत भाजपा के लिए संगठन और मतदाता संपर्क की समीक्षा का अवसर है। वहीं, कांति सिंह की जीत ने समाजवादी पार्टी को राजनीतिक रूप से मजबूत संदेश देने का मौका दिया है।




