30 और 33 प्रतिशत वाले शासनादेश वापस लेने व भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग, विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका
लखनऊ। 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने गुरुवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 30 और 33 प्रतिशत वाले शासनादेश को वापस लेने तथा भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग की। हाथों में पोस्टर-बैनर लेकर अभ्यर्थियों ने नारेबाजी की और सरकार से उनकी मांगों पर कार्रवाई की अपील की। प्रदर्शन की पुष्टि समकालीन स्थानीय रिपोर्टों में भी हुई है।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 68,500 शिक्षक भर्ती को पूरा किया जाए और अभ्यर्थियों को न्याय दिया जाए। उन्होंने सरकार से इस मामले में सीधे बातचीत की मांग भी उठाई।
विधानसभा की ओर बढ़ने से पहले रोका
अभ्यर्थी विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रास्ते में रोक लिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पुलिस बस से ईको गार्डन भेजा गया। ईको गार्डन पहुंचने के बाद भी अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन जारी रखा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आदित्य पांडे ने कहा कि 68,500 शिक्षक भर्ती को लेकर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि भर्ती में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अभ्यर्थियों की सीधे बातचीत कराने की मांग की।
आदित्य पांडे के मुताबिक, अभ्यर्थी विधानसभा घेराव के लिए जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोककर ईको गार्डन भेज दिया। उन्होंने कहा कि सरकार और शासन-प्रशासन से अब तक इस मुद्दे पर ठोस बातचीत नहीं हुई है।
68,500 भर्ती में आरक्षण और कटऑफ को लेकर पुराना विवाद
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में कटऑफ को लेकर पहले भी विवाद रहा है। 21 मई 2018 के शासनादेश में सामान्य वर्ग के लिए 33 प्रतिशत और एससी-एसटी के लिए 30 प्रतिशत न्यूनतम अंक तय किए गए थे, जबकि इससे पहले 9 जनवरी 2018 के शासनादेश में सामान्य और ओबीसी के लिए 45 प्रतिशत तथा अन्य आरक्षित वर्गों के लिए 40 प्रतिशत अंक निर्धारित थे। बाद में न्यायिक प्रक्रिया के तहत भर्ती 45 और 40 प्रतिशत के मानकों के आधार पर आगे बढ़ी और 2019 में राज्य सरकार ने 21 मई 2018 के शासनादेश को निष्प्रभावी कर दिया था।
वर्तमान प्रदर्शन में अभ्यर्थी इसी विवाद से जुड़े शासनादेशों को वापस लेने और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। समकालीन रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की एक प्रमुख मांग आरक्षण संबंधी विसंगतियों को दूर कर संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की भी है।
69,000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी भी कर रहे आंदोलन
इसी दौरान 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने भी लखनऊ में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस भर्ती मामले में आरक्षण और संशोधित चयन सूची को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत में संशोधित आंकड़े और 8,270 अभ्यर्थियों से संबंधित सूची दाखिल की थी।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा था कि पहले से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रहेगी और पात्र नए अभ्यर्थियों को अवसर देने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
दोनों शिक्षक भर्ती मामलों को लेकर अभ्यर्थियों के लगातार आंदोलनों के बीच गुरुवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन के बाद राजधानी में शिक्षक भर्ती का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया।




