कानपुर। चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड की जांच में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, विनीत की हत्या की साजिश उनके बेटे सुब्रत ने रची थी और हत्या के बाद अपनी पत्नी शालू को मामले में फंसाने के लिए सबूत तैयार किए थे। पुलिस ने सुब्रत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, जांच में निर्दोष पाए जाने और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर अदालत के आदेश से शालू को जेल से रिहा कर दिया गया।
पुलिस के अनुसार, 5 सितंबर को इंदिरा नगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट सी-104 में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की चाकू से 17 वार कर हत्या कर दी गई थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस को सुब्रत की भूमिका के संबंध में अहम सुराग मिले। पूछताछ में सुब्रत ने कथित तौर पर हत्या की साजिश में शामिल होने की बात स्वीकार की।
सात महीने पहले निकाले गए कर्मचारियों को बनाया जरिया
पुलिस के मुताबिक, सुब्रत ने अपनी दुकान से करीब सात महीने पहले निकाले गए पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर के जरिए हत्या की योजना को अंजाम दिलाया। पूछताछ में सुब्रत ने पिता पर कई महिलाओं से संबंध रखने और उन पर काफी पैसा खर्च करने का आरोप लगाया। उसका कहना था कि मांगने के बावजूद पिता उसे पैसे नहीं देते थे। इसी पारिवारिक और संपत्ति विवाद के चलते उसने पिता की हत्या की साजिश रची।
पुलिस के मुताबिक, सुब्रत को आशंका थी कि उसके पिता किसी अन्य महिला से शादी कर संपत्ति में नया हिस्सेदार बना सकते हैं। इसी वजह से उसने हत्या की योजना बनाई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान सुब्रत ने हत्या कराने पर किसी तरह का पछतावा नहीं होने की बात कही, हालांकि उसने हत्या के तरीके को लेकर दुख जताया।
पहले चाचा को फंसाने की थी योजना
डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, सुब्रत पिछले एक-दो महीने से पिता की हत्या की योजना बना रहा था। शुरुआत में उसने अपने चाचा पुनीत को हत्या के मामले में फंसाने की योजना बनाई थी, ताकि संपत्ति विवाद का रास्ता साफ हो सके। हालांकि, बाद में चाचा के प्रभाव को देखते हुए उसने योजना बदल दी।
पुलिस के अनुसार, हत्या से करीब 25 दिन पहले सुब्रत ने अपनी पत्नी शालू को ही मामले में फंसाने की साजिश तैयार की। इसके लिए उसने ऐसे साक्ष्य तैयार करने की कोशिश की, जिनसे जांच के दौरान शालू की भूमिका संदिग्ध नजर आए।
शालू को फंसाने के लिए मॉल ले गया
पुलिस के मुताबिक, हत्या से करीब 20 दिन पहले सुब्रत पत्नी शालू को लेकर परेड चौराहा पहुंचा। वहां से दोनों विशाल के साथ बड़ा चौराहा स्थित जेड स्क्वायर मॉल गए। सुब्रत खुद कार में बैठा रहा, जबकि शालू को विशाल के साथ मॉल में खरीदारी के लिए भेजा गया।
पुलिस का कहना है कि इस पूरी कवायद का मकसद बाद में सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर शालू को हत्या की साजिश से जोड़ना था। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को साजिश में सुब्रत की भूमिका के संबंध में अलग तथ्य मिले और शालू को मामले में निर्दोष पाया गया।
जेल में सुब्रत, मायके पहुंची शालू
24 सितंबर को जेल भेजे गए सुब्रत को नियमानुसार 14 दिनों के लिए मुलाहिजा बैरक में रखा गया है। जेल अधीक्षक राजेश पांडेय के मुताबिक, शुरुआत में वह काफी गुमसुम और तनाव में नजर आया। गर्मी और उमस के कारण उसने रात में ठीक से नींद नहीं ली और पहले दिन खाना भी नहीं खाया। अगले दिन उसने नाश्ते में दलिया, गुड़ और चाय ली।
जेल प्रशासन के मुताबिक, अब तक सुब्रत से मिलने परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा है। हालांकि, वह लगातार अपनी पत्नी के बारे में पूछता रहा। 28 सितंबर को शालू की रिहाई की जानकारी मिलने पर वह खुश नजर आया।
वहीं, जेल से रिहा होने के बाद शालू 28 सितंबर की देर रात करीब एक बजे लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित अपने मायके पहुंची। करीब 21 दिन बाद उसने अपने बेटे श्रीजय को देखा। शालू के पिता नरेश अरोड़ा के अनुसार, घर पहुंचते ही वह सो रहे बेटे के पास गई, उसे चूमा और काफी देर तक भावुक होकर उसे निहारती रही। अगली सुबह बेटे ने मां को देखते ही गले लगा लिया और पूरे दिन उससे अलग नहीं हुआ।
पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर शालू की रिहाई के बाद मंगलवार को उनके घर पर रिश्तेदारों और परिचितों का दिनभर आना-जाना लगा रहा। मामले की आगे की जांच और पुलिस की कार्रवाई के बीच हत्याकांड में बेटे की कथित भूमिका ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।




