बहराइच। हरदी थाना पुलिस ने फर्जी पुलिसकर्मी बनकर अवैध वसूली, अपहरण और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 7.8 किलो गांजा, तमंचा-कारतूस, पुलिस की वर्दी, फर्जी पुलिस वाहन और नकदी समेत अन्य सामान बरामद किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में पीएसी से अनिवार्य सेवानिवृत्त कर्मी और बर्खास्त सिपाही भी शामिल हैं।
एसपी विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक, हरदी थानाध्यक्ष आलोक सिंह की टीम को सूचना मिली थी कि सफेद रंग की कार संख्या यूपी32 बीजी6267 को पुलिस वाहन की तरह तैयार कर कुछ लोग दो युवकों को जबरन ले जा रहे हैं। सूचना पर पुलिस ने सिंगिया नसीरपुर बंधे के पास घेराबंदी कर संदिग्ध कार को रोक लिया।
दरोगा की वर्दी में मिला आरोपी
पुलिस के अनुसार, कार चला रहा व्यक्ति दरोगा की वर्दी में था। पूछताछ में उसकी पहचान सुलतानपुर/लखनऊ निवासी समरबहादुर सिंह के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि वह पीएसी का अनिवार्य सेवानिवृत्त कर्मी है। उसके साथ कार में सिद्धार्थनगर निवासी श्रीप्रकाश द्विवेदी उर्फ प्रकाश दुबे भी मौजूद था, जो 2006 बैच का बर्खास्त सिपाही बताया गया है।
पुलिस ने दोनों के अलावा महसी क्षेत्र के स्थानीय सहयोगी मूले अवस्थी और वीरेंद्र उर्फ छोटू को भी गिरफ्तार किया।
गांजे के केस में फंसाने की देते थे धमकी
कार में मिले दोनों युवकों ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने असलहे के बल पर उन्हें जबरन कार में बैठाया था। इसके बाद उन्हें गांजे के झूठे मुकदमे में फंसाने और एनकाउंटर करने की धमकी देकर पैसों की मांग की जा रही थी। पुलिस ने युवकों को आरोपियों के कब्जे से मुक्त कराया।
वर्दी से लेकर पुलिस बैच तक बरामद
तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से 7 किलो 795 ग्राम गांजा, 315 बोर का तमंचा, दो जिंदा कारतूस, दरोगा की वर्दी, पी-कैप, पुलिस बैच, 8,270 रुपये नकद, छह मोबाइल फोन और पुलिस की तरह तैयार की गई कार बरामद हुई।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में समर बहादुर सिंह और श्रीप्रकाश द्विवेदी के खिलाफ पहले से भी लूट, अपहरण और गैंगस्टर एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और इसके नेटवर्क के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
मामले में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चारों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।




