अक्टूबर के अंत तक तापमान में 3 से 4 डिग्री की और गिरावट के आसार, सुबह हल्की धुंध और शाम को ठंडी हवाओं से बढ़ेगी सिहरन
उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। रात के तापमान में गिरावट के साथ सुबह और शाम ठंड का एहसास बढ़ रहा है। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी बनी हुई है, लेकिन रात होते ही मौसम ठंडा होने लगता है। बदलते तापमान के बीच सर्दी-जुकाम और सांस संबंधी समस्याओं की शिकायतें भी बढ़ने लगी हैं। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, अक्टूबर के अंतिम दिनों में तापमान में और गिरावट आ सकती है, जिससे नवंबर की शुरुआत में ठंड का असर अधिक महसूस होने की संभावना है।
रात के तापमान में आई गिरावट
मौसम के बदलते रुख के बीच मंगलवार को न्यूनतम तापमान सामान्य से 2.4 डिग्री कम होकर 17.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले दिनों रात का तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था, लेकिन अब इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है।
वहीं, दिन का अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सुबह और शाम के समय तापमान कम होने तथा हवा में नमी बढ़ने से ठंड का एहसास हो रहा है। मौसम में नमी का अधिकतम स्तर 92 प्रतिशत दर्ज किया गया।
सुबह धुंध, दिन में निकल रही धूप
प्रदेश के कई इलाकों में सुबह के समय हल्की धुंध दिखाई देने लगी है। बुधवार सुबह भी कुछ स्थानों पर आसमान में धुंध छाई रही, जिससे शुरुआती घंटों में दृश्यता प्रभावित हुई। वाहन चालकों को सड़कों पर सावधानी बरतनी पड़ी। हालांकि, धूप निकलने के बाद मौसम सामान्य हो गया।
सुबह ठंडक और दोपहर में गर्मी के कारण तापमान में अंतर महसूस किया जा रहा है। ऐसे मौसम में लोगों को सुबह और रात के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
नवंबर की शुरुआत में बढ़ सकती है ठंड
मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर के अंत तक दिन और रात के तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट संभव है। इससे नवंबर की शुरुआत में ठंड का असर बढ़ सकता है। तापमान में आगे होने वाले बदलाव के आधार पर सर्दी की तीव्रता का आकलन किया जाएगा।
फिलहाल दिन में धूप और रात में ठंड का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। लोगों को सुबह और देर शाम बाहर निकलते समय मौसम के अनुरूप कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है।
रबी फसलों की तैयारी में जुटे किसान
मौसम में बदलाव के साथ कृषि गतिविधियों में भी तेजी आने लगी है। खेतों में धान की कटाई जारी है, जबकि गेहूं, लहसुन और आलू की अगली फसल की तैयारी की जा रही है। किसान खेतों की जुताई और बुवाई से जुड़े जरूरी काम निपटाने में जुटे हैं। कुछ क्षेत्रों में अगैती आलू की बुवाई भी शुरू हो गई है।
पराली प्रबंधन पर जोर जरूरी
धान की कटाई के बाद खेतों को अगली फसल के लिए तैयार किया जा रहा है। इस दौरान कुछ क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके उचित प्रबंधन के तरीके अपनाने चाहिए, ताकि पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।




