बिहार के आठ जिलों से गुजरेगा 568 किमी लंबा एक्सप्रेसवे, छह लेन बनाने की मांग पर भी अब तक मंजूरी नहीं
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना की मंजूरी में देरी से इसके निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। बिहार के पथ निर्माण विभाग ने केंद्र सरकार से परियोजना को जल्द स्वीकृति देने की मांग की है। विभाग ने इसके साथ ही प्रस्तावित चार लेन के एक्सप्रेसवे को छह लेन में विकसित करने का अनुरोध भी किया है। अधिकारियों के मुताबिक, समय पर आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो भूमि अधिग्रहण में विलंब हो सकता है।
कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति की मंजूरी के लिए भेजा है। इस स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण से जुड़ी अगली कार्रवाई आगे बढ़ सकेगी। बिहार सरकार ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है।
आठ जिलों में होगा भूमि अधिग्रहण
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिहार के आठ जिलों—पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किशनगंज को छोड़कर अन्य जिलों में भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
पथ निर्माण विभाग ने आशंका जताई है कि यदि इस साल के अंत तक अधिग्रहण के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो कुछ मामलों में नई अधिसूचना जारी करनी पड़ सकती है। इससे परियोजना की समयसीमा प्रभावित होने की संभावना है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में संबंधित किसानों को उनकी भूमि परियोजना में शामिल होने और अधिग्रहण संबंधी जानकारी दी जाती है।
568 किलोमीटर लंबा होगा एक्सप्रेसवे
गोरखपुर से शुरू होकर देवरिया के रास्ते बिहार में प्रवेश करने वाले इस एक्सप्रेसवे की कुल प्रस्तावित लंबाई करीब 568 किलोमीटर है। इसमें लगभग 417 किलोमीटर हिस्सा बिहार में होगा। यह मार्ग उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच आवागमन को तेज करने के साथ पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
एक्सप्रेसवे बनने से सीतामढ़ी सहित उत्तर बिहार के प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मभूमि माना जाता है, जहां मां जानकी मंदिर का निर्माण भी किया जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।
प्रस्तावित मार्ग के जरिए सिलीगुड़ी और आगे असम तक यात्रा अधिक सुविधाजनक होने की संभावना है। इससे कामाख्या मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि, परियोजना की वास्तविक समयसीमा और निर्माण की शुरुआत केंद्र से आवश्यक मंजूरियां मिलने तथा भूमि अधिग्रहण की प्रगति पर निर्भर करेगी।




