लखनऊ। उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए शुरू की गई उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की हेल्पलाइन 1912 को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद शिकायत निवारण की प्रक्रिया जटिल हो गई है और बड़ी संख्या में शिकायतों का निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान नहीं हो पा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से 20 सितंबर के बीच 1912 हेल्पलाइन पर कुल 96,36,399 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 63,35,239 शिकायतों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर किया गया, जबकि 32,22,108 शिकायतों का समाधान समय सीमा समाप्त होने के बाद हुआ।
वर्टिकल व्यवस्था पर उठे सवाल
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद उसके समाधान की जिम्मेदारी कई स्तरों पर चली जाती है। इससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि शिकायत के समाधान के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार है और देरी होने पर किसकी जवाबदेही तय की जाए।
उन्होंने कहा कि 1912 पर शिकायत दर्ज कराने के बाद उपभोक्ता को समय पर राहत मिलना जरूरी है। यदि शिकायत कई स्तरों की वर्टिकल व्यवस्था में घूमती रहती है तो निस्तारण में देरी होती है और जवाबदेही भी स्पष्ट नहीं रहती।
सीधे जिम्मेदार अधिकारी तक पहुंचे शिकायत
उपभोक्ता परिषद ने वर्टिकल व्यवस्था को खत्म करने या पूरी तरह पुनर्गठित करने की मांग की है। परिषद का सुझाव है कि 1912 को ऐसा जवाबदेह सिस्टम बनाया जाए, जिसमें शिकायत सीधे संबंधित अधिकारी तक पहुंचे और उसके समाधान की समय सीमा पहले से निर्धारित हो।
वर्मा ने कहा कि शिकायतों की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाना चाहिए। निर्धारित समय सीमा में समाधान नहीं होने पर शिकायत स्वतः उच्च अधिकारी के स्तर पर एस्केलेट हो और देरी के लिए संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाए।
केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम न बने 1912
उपभोक्ता परिषद के अनुसार, 1912 को सिर्फ शिकायत दर्ज करने की हेल्पलाइन के बजाय समयबद्ध समाधान और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला तंत्र बनाया जाना चाहिए। परिषद का कहना है कि इससे शिकायतों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजने की प्रक्रिया कम होगी और उपभोक्ताओं को समय पर राहत मिल सकेगी।




