समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बृहस्पतिवार को पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने अयोध्या पहुंचे। हालांकि, इस दौरान उनके रामलला के दर्शन के लिए मंदिर नहीं जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। संतों और भाजपा नेताओं ने उनके दौरे पर सवाल उठाए, जबकि यह मुद्दा एक बार फिर सियासी चर्चा में आ गया।
कथा के दौरान अखिलेश यादव ने भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े सामाजिक न्याय, समानता, प्रेम और बंधुत्व जैसे संदेशों का उल्लेख किया। दूसरी ओर, उनके राम मंदिर नहीं जाने पर कुछ संतों ने नाराजगी जताई और आलोचनात्मक बयान दिए।
पहले भी उठ चुका है दर्शन का मुद्दा
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और रामलला के दर्शन को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अयोध्या में रोड शो किया था, जो नया घाट तक पहुंचा था। उस समय भी उनके रामलला के दर्शन नहीं करने का मुद्दा उठा था। अब उनके ताजा दौरे के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है।
संतों ने की आलोचना
महामंडलेश्वर गिरीश दास ने अखिलेश यादव और उनके परिवार की रामभक्ति पर सवाल उठाते हुए आलोचना की। वहीं, हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने भी उनके दौरे पर टिप्पणी की और लोगों से राजनीतिक नेताओं के धार्मिक बयानों को लेकर सतर्क रहने की अपील की।
भाजपा नेताओं ने भी साधा निशाना
भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि अयोध्या आने के बावजूद रामलला के दर्शन नहीं करना उनकी सोच को दर्शाता है। महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। अन्य स्थानीय भाजपा नेताओं ने राम मंदिर आंदोलन और रामभक्तों के संघर्ष का हवाला देते हुए अखिलेश यादव की आलोचना की।
अखिलेश यादव के इस दौरे के बाद अयोध्या में धार्मिक आस्था और राजनीति को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है।




