सीएम योगी ने कहा- मुकाबला फिर 80 और 20 के बीच, एनडीए के साथ 80 फीसदी तो पीडीए के साथ 20 फीसदी लोग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। लखनऊ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि राज्यसभा में जो स्थिति सामने आई है, उसका असर विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में राजनीतिक मुकाबला एक बार फिर ‘80 और 20’ के बीच आ गया है। उनके मुताबिक 80 फीसदी लोग एनडीए के साथ हैं, जबकि 20 फीसदी लोग पीडीए के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बनने के बाद आया है।
भाजपा के आठ, सपा के दो उम्मीदवार
राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने आठ और समाजवादी पार्टी ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी 10 उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना तय माना जा रहा है। ऐसे में राज्यसभा की इन सीटों के लिए मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राजनीतिक रूप से इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भाजपा के पास आठवीं सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायकों का समर्थन नहीं माना जा रहा था। ऐसे में माना जा रहा था कि समाजवादी पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतार सकती है। यदि ऐसा होता तो आठवीं सीट के लिए मतदान की स्थिति बन सकती थी।
सपा ने तीसरे उम्मीदवार से बनाई दूरी
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि पार्टी की प्राथमिकता आगामी विधानसभा चुनाव है। इसके बाद तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की अटकलों पर विराम लग गया। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि मतदान की स्थिति में क्रॉस वोटिंग का खतरा सपा के लिए चुनौती बन सकता था।
पिछले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले किसी संभावित राजनीतिक जोखिम से बचने के लिए सपा ने तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारा, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है।
80-20 के बयान से फिर गरमाई सियासत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इससे पहले भी चुनावी राजनीति में ‘80 और 20’ का उल्लेख कर चुके हैं। इस बार उन्होंने इसे एनडीए और पीडीए के समर्थन से जोड़ते हुए अपनी राजनीतिक व्याख्या सामने रखी है। हालांकि, यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक दावा है और इसका वास्तविक चुनावी प्रभाव आगामी विधानसभा चुनाव के परिणामों में ही स्पष्ट होगा।
राज्यसभा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन विधानसभा चुनाव के नतीजों का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद राज्यसभा चुनाव के घटनाक्रम ने भाजपा और सपा के बीच सियासी बयानबाजी को जरूर तेज कर दिया है।
‘एक जिला, एक माफिया’ से ‘एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज’ तक
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में ‘एक जिला, एक माफिया’ जैसी स्थिति थी और कानून-व्यवस्था को लेकर अराजकता का माहौल था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश को विकास की दिशा में आगे बढ़ाते हुए ‘एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज’ की दिशा में काम किया है। उन्होंने ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना का भी उल्लेख किया और कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ अब ‘एक जिला, एक कुजीन’ की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ेगा राजनीतिक तापमान
राज्यसभा चुनाव में भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन और सपा का तीसरा उम्मीदवार न उतारने का फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री योगी ने इसे आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए एनडीए के पक्ष में माहौल होने का दावा किया है।
वहीं, समाजवादी पार्टी की नजर अब पूरी तरह विधानसभा चुनाव की रणनीति पर है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच सियासी मुकाबला और तेज होने के आसार हैं।




