इटावा। एशियाई खेलों 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 44 साल बाद स्वर्ण पदक अपने नाम कर इतिहास रच दिया। फाइनल मुकाबले में भारत ने चीन को 1-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पृथ्वीपुरा गांव से जुड़ी हॉकी खिलाड़ी इशिका चौधरी की भूमिका ने परिवार और गांव का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
भारतीय टीम की इस जीत के साथ ही उसने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है। इशिका की सफलता के बाद उनके पैतृक गांव पृथ्वीपुरा में जश्न का माहौल है। परिवार और ग्रामीणों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर भारतीय टीम की जीत की खुशी मनाई।
11 साल की उम्र में थामी हॉकी स्टिक
इशिका चौधरी ने महज 11 वर्ष की उम्र में हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। उन्होंने हॉकी की शुरुआती बारीकियां मध्य प्रदेश महिला हॉकी अकादमी में सीखीं। कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास के दम पर उन्होंने कम उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली।
इशिका ने वर्ष 2017 में जूनियर महिला ऑस्ट्रेलियाई हॉकी लीग से अपने अंतरराष्ट्रीय जूनियर करियर की शुरुआत की। वर्ष 2018 में ब्यूनस आयर्स में आयोजित तीसरे यूथ ओलंपिक खेलों में उन्होंने भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और टीम ने रजत पदक हासिल किया।
जूनियर विश्व कप से सीनियर टीम तक सफर
वर्ष 2022 में इशिका दक्षिण अफ्रीका में आयोजित एफआईएच महिला जूनियर विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। इस प्रतियोगिता में भारतीय टीम चौथे स्थान पर रही। इसी वर्ष उन्होंने एफआईएच प्रो लीग के दौरान भारतीय सीनियर महिला हॉकी टीम में पदार्पण किया।
इसके बाद इशिका भारतीय टीम की डिफेंस लाइन की अहम खिलाड़ी बनकर उभरीं। उनकी मजबूत डिफेंस और मैदान पर शानदार प्रदर्शन ने टीम को कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में मजबूती दी।
गांव में खुशी का माहौल
इशिका चौधरी की ऐतिहासिक उपलब्धि पर उनके पैतृक गांव पृथ्वीपुरा में खासा उत्साह है। परिवार के लोगों के साथ उनके बाबा विजय चौधरी और चाचा संतोष चौधरी ने भी उनकी सफलता पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इशिका ने भारतीय महिला हॉकी टीम का हिस्सा बनकर न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन किया है।
परिजनों का कहना है कि इशिका की सफलता गांव और आसपास की बेटियों के लिए प्रेरणा बनेगी। उनकी उपलब्धि से खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखने वाली बेटियों को भी नई ऊर्जा और हौसला मिलेगा।




