सुभाष पार्क पर मार्च रोके जाने के बाद बढ़ा तनाव, सपा नेताओं की नजरबंदी का भी आरोप; विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
आगरा। आगरा में समाजवादी पार्टी के प्रस्तावित ‘संविधान बचाओ मार्च’ को लेकर गुरुवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। सुभाष पार्क से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति भी सामने आई। महिला कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प की बात भी सामने आई है।
नेताओं को नजरबंद करने का आरोप
मार्च से पहले सपा नेताओं और पदाधिकारियों को उनके घरों पर नजरबंद किए जाने का आरोप पार्टी की ओर से लगाया गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस की सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सुभाष पार्क पहुंचे और मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया।
पुलिस कार्रवाई पर विपक्ष के सवाल
सपा नेताओं ने पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। वहीं, पुलिस की ओर से मार्च को रोकने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए की गई कार्रवाई को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान से जुड़ा कार्यक्रम
यह प्रदर्शन सपा के ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रमों का हिस्सा था। पार्टी ने इसके तहत संगठनात्मक बैठकों, संविधान जागरूकता कार्यक्रमों और कार्यकर्ताओं की समितियां बनाने की योजना बनाई थी। 8 अक्टूबर को आगरा में मार्च के साथ अभियान के समापन का कार्यक्रम तय किया गया था।
फिलहाल मार्च रोके जाने और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद आगरा में राजनीतिक माहौल गरम है। पुलिस और सपा की ओर से कार्रवाई को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं।




