मिर्जापुर: पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल की ओर से लहुरियादह गांव में स्वीकृत उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण शुरू नहीं होने का मुद्दा उठाए जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। गांव में अब उच्च प्राथमिक विद्यालय के भवन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। करीब 25.58 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस विद्यालय से गांव के बच्चों को कक्षा आठ तक की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो जारी कर लहुरियादह में स्वीकृत विद्यालय का निर्माण तीन साल बाद भी शुरू नहीं होने पर सवाल उठाए थे। इसके अगले ही दिन प्रशासनिक स्तर पर निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
जमीन की नापी के बाद शुरू हुई नींव की खुदाई
बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को खंड शिक्षा अधिकारी हलिया प्रकाश चंद्र यादव गांव पहुंचे। उनकी मौजूदगी में विद्यालय के लिए आवंटित भूमि की नापी कराई गई। इसके बाद भवन की नींव के लिए खुदाई का काम शुरू कराया गया। विद्यालय भवन का निर्माण प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह के प्रधानाध्यापक गंगा शंकर ओझा की देखरेख में कराया जाएगा।
बीएसए अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह के उच्चीकरण को वर्ष 2025-26 में स्वीकृति मिली थी। इसके लिए 25.58 लाख रुपये की धनराशि भी आवंटित की गई है, जिसे विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में हस्तांतरित किया जा चुका है।
2024 में मिली थी विद्यालय को मंजूरी
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2023 में तत्कालीन डीएम दिव्या मित्तल ने लहुरियादह गांव का निरीक्षण किया था। इसी दौरान गांव की महिला देवकली ने बच्चों की शिक्षा की समस्या बताते हुए गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय खोलने की मांग की थी। इसके बाद विद्यालय निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया और वर्ष 2024 में इसे स्वीकृति मिल गई।
हालांकि स्वीकृति और धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका था। अब निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों में खुशी है।
गांव में ही मिलेगी आठवीं तक की शिक्षा
विद्यालय भवन बनने के बाद लहुरियादह गांव के बच्चों को कक्षा पांच के बाद पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के गरीब और श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए यह बड़ी सुविधा होगी।
ग्रामीण देवकली, कृष्णा वर्मा, गीता देवी, हीरा यादव, चौरसिया देवी, लालबहादुर यादव और रमेश यादव समेत अन्य लोगों ने स्कूल का निर्माण शुरू होने पर खुशी जताई। ग्राम प्रधान कौशलेंद्र गुप्ता ने भी इसे गांव के बच्चों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
दिव्या मित्तल ने उठाया था ‘गायब स्कूलों’ का मुद्दा
पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में लहुरियादह की पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि निरीक्षण के दौरान एक महिला ने उनसे गांव में पांचवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई के लिए स्कूल की मांग की थी। उन्होंने बताया कि महिला ने पेंशन या मकान जैसी सुविधा के बजाय बच्चों की शिक्षा के लिए विद्यालय की मांग की थी।
दिव्या मित्तल ने कहा कि उस समय विद्यालय की स्वीकृति के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी, लेकिन वर्षों बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब पैसा और स्वीकृति उपलब्ध थी तो निर्माण क्यों नहीं हुआ। उनके इस सवाल के बाद अब विद्यालय भवन का निर्माण शुरू हो गया है।



