लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा के करीब 4,000 करोड़ रुपये के भूमि मामले में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज ने सोमवार को बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। हरीश चंद्र वर्तमान में कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे।
नोएडा प्राधिकरण में तैनाती के दौरान लगे थे आरोप
हरीश चंद्र पर नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनाती के दौरान शाहदरा गांव से जुड़ी जमीन के लीज-बैक में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। जांच के मुताबिक, सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 में प्राधिकरण द्वारा अर्जित और कब्जे में ली गई 3,81,527 वर्गमीटर भूमि से संबंधित मामलों में नियमों का पालन नहीं किया गया। इस मामले में 27 सितंबर 2013 को अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।
सर्वे में तथ्यों को छिपाने का आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार, शाहदरा गांव की आबादी के निर्धारण के लिए किए गए सर्वे में नियमों के मुताबिक सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल नहीं किया गया। रिपोर्ट में कई भू-मालिकों, निजी कंपनियों और गांव के बाहर के लोगों को भी शामिल किए जाने की बात सामने आई।
जांच में यह भी कहा गया कि लीज-बैक के लिए जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, प्राधिकरण बोर्ड और अन्य अधिकारियों वाली समिति के सामने कथित तौर पर भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसके आधार पर करीब 4,00,447 वर्गमीटर भूमि, जिसकी बाजार कीमत लगभग 4,000 करोड़ रुपये आंकी गई, के अनियमित आवंटन का मामला सामने आया।
विभागीय जांच में आरोप सिद्ध
शासन के आदेश के अनुसार, विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में हरीश चंद्र के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध पाए गए। कार्रवाई में प्रयागराज स्थित लोक सेवा आयोग की 6 जनवरी 2022 की सहमति और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में सामने आए तथ्यों को भी आधार बनाया गया है। इसके बाद सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया।
सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि उनके खिलाफ चल रही विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही को समाप्त करने की मंजूरी दी गई है।




