ग्रेटर नोएडा। 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में इस बार ब्रज क्षेत्र की ग्रामीण महिलाओं के हुनर और उनके उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का मंच मिलेगा। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ट्रेड शो में अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगी।
कांच के सजावटी सामान से जूट बैग तक होंगे प्रदर्शित
ट्रेड शो में आगरा मंडल के विभिन्न जिलों के स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। फिरोजाबाद की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए कांच के सजावटी उत्पाद आकर्षण का केंद्र होंगे। वहीं मथुरा की समूह महिलाओं के बनाए मिट्टी के बर्तन, तुलसी गमले और फ्लावर पॉट भी प्रदर्शित किए जाएंगे।
मैनपुरी के स्वयं सहायता समूहों की ओर से आर्टिफिशियल ज्वेलरी, टेडीबियर और जूट बैग समेत कई उत्पाद स्टॉल पर उपलब्ध रहेंगे। इन उत्पादों की बिक्री से ग्रामीण महिलाओं को सीधे आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
महिला सशक्तीकरण की योजनाओं की भी मिलेगी जानकारी
ट्रेड शो में उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के साथ उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। समूह गठन, टेक होम राशन, बीसी सखी और विद्युत सखी जैसी योजनाओं के बारे में आगंतुकों को जागरूक किया जाएगा।
आगरा के सैंया ब्लॉक की ग्राम पंचायत ब्रिथला की बीसी सखी ममता भी आयोजन में हिस्सा लेंगी। उनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी को प्रदर्शित किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने से उत्साहित महिलाएं
ट्रेड शो में हिस्सा लेने को लेकर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं उत्साहित हैं। मैनपुरी के लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की रीना ने कहा कि गांव में तैयार किए जाने वाले आर्टिफिशियल ज्वेलरी, टेडीबियर और जूट बैग जैसे उत्पादों को बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। वहीं फिरोजाबाद के एकता स्वयं सहायता समूह की शांति देवी ने कहा कि कांच के सजावटी उत्पादों को देश-विदेश के खरीदारों तक पहुंचने से महिलाओं की आय और उनका आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
आगरा के उपायुक्त प्रेम चंद के अनुसार, यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि ब्रज की महिलाओं के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने के अवसर पैदा होंगे।




