धनौली के गोदाम से करीब 5 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त होने के बाद टेढ़ी बगिया और यमुना किनारे मिला दवाओं का ढेर; तीन आरोपी जेल में, मुख्य आरोपी समेत अन्य की तलाश जारी
आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में कथित नकली और अवैध दवा कारोबार का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। औषधि विभाग की छापेमारी में धनौली के एक खंडहरनुमा गोदाम से करीब पांच करोड़ रुपये की दवाएं जब्त किए जाने के बाद टेढ़ी बगिया और यमुना किनारे कई स्थानों पर दवाओं के पैकेट, कार्टन और बोरियां बिखरी मिलीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ दवाओं को खुले स्थानों पर फेंका गया, जबकि कुछ को आग के हवाले कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई अवैध दवा भंडारण और बिक्री के नेटवर्क की जांच का हिस्सा है।
मामले में चिंता की बात यह है कि फेंकी गई दवाओं में एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जी, ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल बताई जा रही हैं। दवाओं के नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी आनी बाकी है, इसलिए बरामद सभी दवाओं को नकली घोषित करने की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। हालांकि, खुले स्थानों पर दवाएं फेंकने और जलाने से लोगों, पशुओं तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

धनौली में छापेमारी से खुला मामला
औषधि विभाग और मलपुरा पुलिस की टीम ने 28 सितंबर को धनौली गांव में तीन छतरी के पास एक परिसर में छापा मारा था। अधिकारियों के मुताबिक, यहां बिना वैध लाइसेंस के बड़ी मात्रा में दवाओं का भंडारण किया गया था। कार्रवाई के दौरान करीब पांच करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की गईं और जांच के लिए 15 से अधिक नमूने लिए गए।
सहायक औषधि आयुक्त अरविंद गुप्ता के अनुसार, पूछताछ में एक आरोपी ने दवाओं की खरीद टेढ़ी बगिया क्षेत्र के शामिन उर्फ छोटू और सलुआ उर्फ मुकीम से किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस ने इस प्रकरण में इकरार, सलुआ और शामिन को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। मुख्य आरोपी हिमांशु अग्रवाल और एक ट्रांसपोर्टर के फरार होने की जानकारी दी गई है।
यमुना किनारे और खेतों में मिलीं दवाओं की बोरियां
धनौली में कार्रवाई के बाद टेढ़ी बगिया और यमुना किनारे कई स्थानों पर दवाओं के पैकेट और बोरियां मिलने की सूचना सामने आई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, खाली प्लॉटों, झाड़ियों, खेतों, नालों और गड्ढों में दवाएं फेंकी गई थीं। कुछ जगहों पर दवाओं को जलाए जाने की बात भी सामने आई है।
यमुना किनारे काम करने वाले एक मजदूर ने बताया कि करीब दस दिन पहले एक छोटे मालवाहक वाहन से कुछ युवक बोरियां उतारकर खाली प्लॉट में ले गए थे। उनके अनुसार, बोरियों में आग लगाने के बाद वहां धुआं उठने लगा। स्थानीय लोगों का दावा है कि दवाओं के जलने के बाद भी कई दिनों तक कुछ स्थानों से धुआं निकलता रहा।
क्षेत्र के पशुपालकों और किसानों ने भी खेतों तथा झाड़ियों में दवाओं की बोरियां मिलने की बात कही है। उनका कहना है कि खुले में पड़ी दवाओं तक पशुओं की पहुंच हो सकती है। ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से दवाओं को सुरक्षित तरीके से हटाने और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
जांच के दायरे में कई तरह की दवाएं
विभागीय कार्रवाई के दौरान केटोरॉल, कार्डेस, एलेग्रा, एलेग्रा-एम, लोसर-एच और जुलरा सहित कई ब्रांड की दवाओं के नाम सामने आए हैं। इसके अलावा एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जी और ब्लड प्रेशर से संबंधित दवाएं भी मिलने की जानकारी दी गई है।
औषधि विभाग की जांच में दवाओं के स्रोत, भंडारण, खरीद-बिक्री के दस्तावेज और वितरण नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध दवा कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ अभियान जारी है और इस नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांची जा रही है।
दवाएं खुले में फेंकना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा
एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अंकुर गोयल के अनुसार, एक्सपायर या अनुपयोगी दवाओं का निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। इन्हें खुले स्थानों पर फेंकना या सामान्य कचरे की तरह जलाना स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं के अवशेष मिट्टी और पानी में पहुंचने पर एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी रोगाणुरोधी दवा प्रतिरोध की समस्या को बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। दूषित पर्यावरण के संपर्क में आने वाले पशुओं और मनुष्यों पर भी इसका असर पड़ सकता है। इसलिए दवाओं के सुरक्षित संग्रहण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की व्यवस्था जरूरी है।
मुख्य आरोपी की भूमिका की जांच
औषधि विभाग के अनुसार, धनौली में बरामद दवाओं के मामले में मलपुरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से एक वीडियो मिलने की बात भी अधिकारियों ने कही है। उनके मुताबिक, वीडियो में यमुना किनारे दवाओं को ज्वलनशील पदार्थ डालकर जलाते हुए दिखाया गया है। इसकी तारीख और अन्य परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों ने मुख्य आरोपी हिमांशु अग्रवाल के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है। विभागीय जानकारी के अनुसार, वह इससे पहले अक्टूबर 2025 में एक अन्य मामले में गिरफ्तार हुआ था। मौजूदा प्रकरण में उसकी भूमिका, कथित गोदामों और वितरण नेटवर्क की जांच जारी है।
आगरा में सामने आया यह मामला केवल अवैध दवा कारोबार तक सीमित नहीं है। खुले में दवाओं को फेंकने और जलाने की घटनाओं ने सुरक्षित निस्तारण, निगरानी और दवा आपूर्ति शृंखला पर भी सवाल खड़े किए हैं। अब जांच के नतीजों से स्पष्ट होगा कि जब्त दवाओं की वास्तविक स्थिति क्या थी और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही।




