198 किलो वजन उठाकर हासिल किया रजत पदक, एशियाई खेलों में भारत के 28 साल के पदक इंतजार का हुआ अंत
नागोया। भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने बुधवार को एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह एशियाई खेलों में मीराबाई का पहला पदक है। उनकी इस उपलब्धि के साथ वेटलिफ्टिंग में एशियाई खेलों के पदक का भारत का 28 साल लंबा इंतजार भी खत्म हुआ।
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मीराबाई ने कुल 198 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच में 87 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 111 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उत्तर कोरिया की री सोंग गम ने 215 किलोग्राम के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंडोनेशिया की लुलुक डायना ट्राई विजायाना ने 191 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

तीसरे प्रयास में पूरा हुआ एशियन गेम्स का सपना
मीराबाई का यह तीसरा एशियन गेम्स अभियान था। इससे पहले वह 2014 और 2023 में एशियाई खेलों में हिस्सा ले चुकी थीं, लेकिन पदक नहीं जीत सकी थीं। 2023 में वह चौथे स्थान पर रही थीं। इस बार रजत पदक के साथ उन्होंने अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पदकों के संग्रह में एशियन गेम्स का पदक भी जोड़ लिया।

28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में भारत को पदक
मीराबाई के रजत पदक ने एशियाई खेलों की वेटलिफ्टिंग में भारत के लंबे इंतजार को समाप्त किया। इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने 1998 के बैंकॉक एशियन गेम्स में भारत के लिए वेटलिफ्टिंग में पदक जीता था। मीराबाई की उपलब्धि के बाद भारतीय वेटलिफ्टिंग को एक बार फिर एशियाई खेलों के पोडियम पर जगह मिली है।

मीराबाई ने कहा- सपना हुआ पूरा
पदक जीतने के बाद मीराबाई ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एशियन गेम्स में पदक जीतना उनका लंबे समय से सपना था। उन्होंने इस उपलब्धि पर खुद पर गर्व जताया।
ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई के नाम विश्व चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों के पदक भी हैं। एशियन गेम्स का रजत उनके प्रमुख अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के संग्रह में एक और अहम पदक है।




