निजी खेतों में गिरे वृक्षों को हटाने के आवेदनों का जल्द होगा निपटारा, ट्रांजिट परमिट प्राथमिकता से जारी करने को कहा
उत्तर प्रदेश में सितंबर और अक्टूबर के दौरान चक्रवाती तूफान, तेज आंधी और भारी बारिश से किसानों की निजी भूमि और खेतों में पेड़ गिरने की घटनाओं को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लिया है। प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों, वन विभाग और उत्तर प्रदेश वन निगम को गिरे हुए पेड़ों को हटाने और उनके निस्तारण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि किसानों की ओर से निजी भूमि पर गिरे पेड़ों को हटाने या उनकी लकड़ी के निस्तारण के लिए दिए जाने वाले आवेदनों को लंबित न रखा जाए। संबंधित अधिकारी निर्धारित नियमों के तहत तत्काल कार्रवाई करें, जिससे किसानों को राहत के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
लकड़ी के परिवहन के लिए जल्द जारी हों परमिट
गिरे हुए पेड़ों की लकड़ी को ले जाने और उसका निस्तारण करने में किसानों को परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक ट्रांजिट परमिट प्राथमिकता के आधार पर जारी करने को कहा गया है। परमिट की प्रक्रिया वन नियमों के अनुरूप पूरी की जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि कागजी औपचारिकताओं के कारण प्रभावित किसानों को अतिरिक्त दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
सड़कों पर गिरे पेड़ तत्काल हटाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मार्गों पर गिरे पेड़ों को भी जल्द हटाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को सड़क पर आवागमन बाधित होने की स्थिति में तत्काल कदम उठाने को कहा गया है, ताकि यातायात सामान्य बना रहे और आम लोगों को परेशानी न हो।
डीएम और वन अधिकारी करेंगे संयुक्त निरीक्षण
प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखने के लिए जिलाधिकारियों और प्रभागीय वनाधिकारियों को संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पेड़ों के निस्तारण की प्रक्रिया के दौरान किसानों को किसी तरह के अनावश्यक मानसिक दबाव या आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
पारदर्शिता के साथ कार्रवाई पर जोर
मुख्यमंत्री ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर बल दिया है। गिरे हुए वृक्षों को हटाने, लकड़ी के परिवहन और निस्तारण से जुड़े सभी कार्य नियमानुसार किए जाएंगे। सरकार का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान करना प्राथमिकता है, ताकि उन्हें राहत मिल सके और सामान्य कामकाज बहाल हो सके।




