वाणिज्य मंत्री ने समझौते की आलोचना करने वाले दलों पर साधा निशाना, RCEP से बाहर रहने के फैसले को बताया देशहित में; अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भरोसा जताया है कि यह समझौता देश के संवेदनशील हितों और घरेलू कारोबारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि समझौते की शर्तें और विस्तृत जानकारी आधिकारिक रूप से सामने आने के बाद देश को इसके लाभ समझ में आएंगे। एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने व्यापार समझौते की आलोचना कर रहे राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा।
घरेलू उद्योग और कारोबारियों के हितों की सुरक्षा पर जोर
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देते समय देश के संवेदनशील क्षेत्रों और घरेलू कारोबारियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक होने के बाद लोग इसके परिणामों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे।
मंत्री ने समझौते का विरोध कर रहे राजनीतिक दलों की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियां इस विषय की पर्याप्त समझ और दूरदर्शिता की कमी को दर्शाती हैं। सरकार का जोर ऐसे व्यापारिक ढांचे पर है, जिससे भारत को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर मिलें और घरेलू उद्योगों के हित भी सुरक्षित रहें।
RCEP से बाहर रहने के फैसले को बताया सही
गोयल ने वर्ष 2019 में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) समझौते से भारत के बाहर रहने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि इस समझौते में शामिल होने से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था और घरेलू बाजार में विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती थी।
उन्होंने चेतावनी दी कि RCEP में शामिल होने से भारत के विनिर्माण क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती थीं। उनके अनुसार, इससे भारत में उत्पादन और रोजगार बढ़ाने के बजाय विदेशी सामानों की बिक्री पर निर्भरता बढ़ने का खतरा था। गोयल ने इस फैसले को देश के औद्योगिक हितों की रक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया।
अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को फरवरी में अंतिम रूप दिए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, अमेरिकी कर और टैरिफ नियमों में बदलाव के चलते दोनों देशों के बीच शर्तों को लेकर बातचीत जारी रहने की जानकारी दी गई है।
भारत की रणनीति अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए अनुकूल टैरिफ व्यवस्था हासिल करना है। इससे भारतीय निर्यातकों को बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर अवसर मिल सकते हैं। व्यापार की शर्तें अनुकूल होने पर भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत करने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में देशों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और तुलनात्मक लाभ की अहम भूमिका होती है। भारत-अमेरिका समझौते का उद्देश्य भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों के लिए नए अवसर तैयार करना है, ताकि देश वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत कर सके।
अब दोनों देशों के बीच बातचीत के नतीजों और समझौते की अंतिम शर्तों पर नजर रहेगी। समझौते का वास्तविक प्रभाव टैरिफ, बाजार तक पहुंच और विभिन्न क्षेत्रों के लिए तय प्रावधानों पर निर्भर करेगा।



