लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट वितरण को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के आंतरिक आकलन में करीब 100 मौजूदा विधायकों के खिलाफ जमीनी स्तर पर एंटी-इनकंबेंसी के संकेत मिले हैं। ऐसे में इनमें से कई विधायकों को आगामी चुनाव में टिकट नहीं मिलने की संभावना जताई जा रही है
255 सीटों पर जुटाया गया फीडबैक
रिपोर्ट के अनुसार, BJP ने प्रदेश की उन 255 विधानसभा सीटों पर जमीनी आकलन कराया है, जहां उसके मौजूदा विधायक हैं। इसमें मतदाताओं के बीच विधायकों की स्थिति, स्थानीय संगठन के साथ तालमेल और चुनाव में संभावित प्रदर्शन जैसे पहलुओं पर फीडबैक लिया गया है। पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कुछ विधायकों को लेकर जनता के बीच भरोसे में कमी की बात सामने आई है।
इसके अलावा स्थानीय संगठन के पदाधिकारियों के साथ विधायकों के संबंध और संगठनात्मक स्तर पर मतभेद को भी आकलन का हिस्सा बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विधायकों की उम्मीदवारी को लेकर RSS से भी फीडबैक लिए जाने की बात सामने आई है।
टिकट में जीत की संभावना को प्राथमिकता
रिपोर्ट के अनुसार, आगामी चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में जीत की संभावना को वरिष्ठता और पिछली चुनावी जीत की संख्या से अधिक महत्व दिए जाने की बात कही जा रही है। यानी लंबे समय से विधायक रहे नेताओं के बजाय उन चेहरों पर भी विचार किया जा सकता है जिनके बारे में जमीनी फीडबैक बेहतर हो।
पार्टी के भीतर यह आकलन भी किया जा रहा है कि लंबे समय से एक ही सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर असंतोष तो नहीं है। हालांकि, अंतिम टिकट वितरण पर फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।
नए चेहरों को मिल सकता है मौका
मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि BJP कुछ विधानसभा क्षेत्रों में नए और युवा चेहरों को मौका देने पर विचार कर सकती है। पार्टी के आंतरिक सर्वे और विधानसभा स्तर से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर उम्मीदवारों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल किसी विधायक का टिकट कटना आधिकारिक रूप से तय नहीं हुआ है।
2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन पर भी नजर
उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP की सीटों की संख्या 2019 के 62 से घटकर 33 रह गई थी। पार्टी ने 49 मौजूदा सांसदों को दोबारा मैदान में उतारा था, जिनमें से 27 चुनाव हार गए। इसी पृष्ठभूमि में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में जमीनी फीडबैक पर अधिक जोर दिए जाने की रिपोर्ट सामने आ रही है।
सामाजिक समीकरण और संगठन भी अहम
टिकट वितरण के साथ BJP के सामने सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की चुनौती भी है। पार्टी विधानसभा क्षेत्रवार फीडबैक, संगठन की स्थिति और संभावित उम्मीदवारों की चुनावी क्षमता जैसे पहलुओं पर विचार कर रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दल भी 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
फिलहाल BJP की ओर से 100 या उससे अधिक मौजूदा विधायकों के टिकट काटने को लेकर कोई अंतिम आधिकारिक सूची या फैसला जारी नहीं किया गया है। इसलिए यह संख्या फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स और पार्टी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी पर आधारित है।




