बहराइच में अनुसूचित जाति के बेरोजगारों को प्रशिक्षण देने की योजना में अनियमितताओं का मामला, जांच में क्षमता से अधिक प्रशिक्षण और नियमों के विपरीत भुगतान का खुलासा
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के माध्यम से संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। बहराइच में अनुसूचित जाति के बेरोजगारों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से चलाई जा रही योजना में नियमों की अनदेखी किए जाने की बात जांच में सामने आई है। शासन ने मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। हालांकि, प्रशिक्षण देने वाली निजी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सीमित जगह में 250 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देने का दावा
शिकायत के बाद समाज कल्याण निदेशालय की ओर से कराई गई जांच में प्रशिक्षण केंद्रों की क्षमता और प्रशिक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्थानों पर इतनी जगह भी नहीं थी कि 100 लोग एक साथ बैठ सकें, जबकि वहां 250 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देने का दावा किया गया। इससे प्रशिक्षण की वास्तविकता और गुणवत्ता को लेकर संदेह जताया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि प्रशिक्षण सहयोगी संस्थाओं के चयन और भुगतान की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि नियमों के तहत 30 प्रतिशत अग्रिम भुगतान किए जाने के बजाय संबंधित प्रशिक्षण भागीदारों को 50 प्रतिशत अग्रिम राशि का भुगतान कर दिया गया।
चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी
यह प्रशिक्षण प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत कराया जाता है। योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति के बेरोजगार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इसका संचालन समाज कल्याण विभाग के अधीन उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम करता है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशिक्षण सहयोगी संस्थाओं का चयन निर्धारित निविदा प्रक्रिया के बजाय नामांकन के आधार पर किया गया। साथ ही, चयनित संस्थाओं की तकनीकी क्षमता, अनुभव, संसाधनों और प्रशिक्षण ढांचे के मूल्यांकन से जुड़े जरूरी अभिलेख भी उपलब्ध नहीं मिले। जांच दल ने इन कमियों को वित्तीय नियमों, शासनादेशों और कौशल विकास मिशन के प्रावधानों का उल्लंघन माना।
दो अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
मामले में उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के तत्कालीन प्रभारी महाप्रबंधक और जिला समाज कल्याण अधिकारी विपिन कुमार पांडेय को जुलाई में निलंबित किया गया था। इसके अलावा बहराइच की तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) श्रद्धा पांडेय के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई।
हालांकि, प्रशिक्षण देने वाली निजी संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें किए गए भुगतान की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संस्थाओं को भुगतान भी किया गया। इस मामले में संबंधित संस्थाओं का पक्ष सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारियों से जवाब का इंतजार
मामले को लेकर उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के प्रबंध निदेशक शिव प्रसाद से फोन और संदेश के जरिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिला। समाज कल्याण निदेशक संजीव सिंह ने कहा कि निदेशालय की भूमिका जांच तक सीमित थी। वहीं, प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव से भी प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन संदेश भेजे जाने के बाद भी जवाब नहीं मिल सका।
कौशल विकास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद युवाओं को रोजगार के योग्य बनाना है। ऐसे में प्रशिक्षण की गुणवत्ता, लाभार्थियों की वास्तविक उपस्थिति, संस्थाओं के चयन और सरकारी धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच अहम है। निजी संस्थाओं की जवाबदेही और भुगतान से जुड़े सवालों पर विभागीय स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।




