150 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना से पश्चिमी यूपी की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद, गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की भी योजना
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। करीब 150 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को चार लेन का बनाने की तैयारी है। इसके लिए मुरादाबाद और अलीगढ़ जिलों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज की गई है। परियोजना पूरी होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा आसान होने और समय की बचत होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित हाईवे मुरादाबाद से शुरू होकर अमरोहा, संभल और बुलंदशहर होते हुए अलीगढ़ तक पहुंचेगा। इससे पश्चिमी यूपी के कई जिलों के बीच सड़क संपर्क मजबूत हो सकता है और यात्रियों के साथ माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
67 गांवों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में
हाईवे निर्माण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मुरादाबाद जिले के 22 गांवों में करीब 190 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है। प्रभावित जमीन के मालिकों और किसानों को मुआवजा सीधे उनके बैंक खातों में दिए जाने की योजना है।
वहीं, अलीगढ़ जिले की गभाना और कोल तहसीलों के 45 गांवों की जमीन भी परियोजना के लिए चिह्नित की गई है। मुरादाबाद में प्रस्तावित मार्ग से प्रभावित होने वाले इलाकों में जमीन की खरीद-बिक्री और नए बैनामों पर रोक लगाए जाने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान भूमि से जुड़े लेनदेन को नियंत्रित करना है।
तीन से चार घंटे का सफर घटने की उम्मीद
फिलहाल मुरादाबाद से अलीगढ़ पहुंचने में चंदौसी, बहजोई, बाबराला और डिबाई जैसे रास्तों से गुजरते हुए करीब तीन से चार घंटे लग सकते हैं। संकरी सड़कों, जाम और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यात्रा में अधिक समय लगता है।
नया हाईवे तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर करीब डेढ़ से दो घंटे में पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय सड़क निर्माण पूरा होने, यातायात शुरू होने और रास्ते की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार का प्रस्ताव
प्रस्तावित हाईवे पर वाहनों की गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने की योजना बताई गई है। अंतिम गति सीमा सड़क के डिजाइन और लागू यातायात नियमों के अनुसार तय होगी। योजना के मुताबिक, दोपहिया और तिपहिया वाहनों को इस मार्ग पर चलने की अनुमति नहीं होगी। वाहनों के प्रवेश और निकास के लिए निर्धारित इंटरचेंज बनाए जाएंगे।
सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंडरपास, ऊंचाई पर बने बाईपास और पैदल यात्रियों के लिए पुल बनाने की योजना भी शामिल है। इससे स्थानीय यातायात और हाईवे पर तेज गति से चलने वाले वाहनों के बीच टकराव का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
बड़े पुल के निर्माण की भी योजना
मुरादाबाद-अलीगढ़ मार्ग पर एक बड़े पुल का निर्माण भी प्रस्तावित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके लिए जून 2026 में 12.5 करोड़ रुपये का निर्माण टेंडर जारी किया गया था। पुल और अन्य जरूरी ढांचागत कार्य पूरे होने से मार्ग पर आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है।
गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने पर मिलेगा फायदा
मुरादाबाद-अलीगढ़ हाईवे को बदायूं लिंक के माध्यम से गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की भी योजना है। यह कनेक्शन विकसित होने पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से प्रयागराज समेत पूर्वी यूपी के दूसरे इलाकों तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त सड़क मार्ग उपलब्ध करा सकता है।
इसके साथ ही आगरा-अलीगढ़ चार लेन परियोजना भी क्षेत्र की सड़क कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस मार्ग के शुरुआती 28 किलोमीटर हिस्से को चौड़ा करने का काम मार्च में शुरू हुआ था और इसे 2028 तक पूरा करने की उम्मीद है।
हाईवे के आसपास कारोबार बढ़ने की संभावना
प्रस्तावित हाईवे के आसपास हरदुआगंज, पनैठी और गभाना जैसे इलाकों में कृषि भूमि, रियल एस्टेट, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को लेकर मांग बढ़ने की जानकारी सामने आई है। बेहतर सड़क संपर्क से इन क्षेत्रों में माल की ढुलाई आसान हो सकती है और कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हालांकि, जमीन की कीमतों में वास्तविक बदलाव और नए कारोबार के विस्तार का स्तर परियोजना की प्रगति, स्थानीय बाजार और अन्य आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस परियोजना से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क बेहतर होने और लंबी दूरी के सफर को सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है।




