रामपुर: जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारोबारी सलीम से लंबी पूछताछ की है। सलीम को सपा नेता आजम खां का करीबी बताया जाता रहा है। जांच एजेंसी ने उनसे ट्रस्ट को दिए गए करोड़ों रुपये के कथित दान और उसकी रकम के स्रोत से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, ईडी ने सलीम को इससे पहले भी पूछताछ के लिए तलब किया था। बुधवार को उन्हें दोबारा एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए बुलाया गया। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने जौहर ट्रस्ट को दी गई दान राशि, उसके स्रोत और उससे संबंधित वित्तीय दस्तावेजों के बारे में जानकारी ली।
कई समन के बाद पेश हुए थे सलीम
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने सलीम और उनके सहयोगी अनवर को पूछताछ के लिए समन जारी किए थे। बताया जा रहा है कि सलीम को कई बार समन भेजे जाने के बावजूद वह जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए थे। बाद में वह पिछले सप्ताह ईडी के समक्ष पहुंचे, जहां उनसे प्रारंभिक पूछताछ की गई। इसके बाद दान से संबंधित दस्तावेजों के साथ उन्हें दोबारा बुलाया गया।
ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट को दी गई रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और दान के रूप में दी गई राशि से जुड़े वित्तीय लेनदेन की प्रकृति क्या रही। जांच एजेंसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।
अन्य कारोबारियों से भी पूछताछ की तैयारी
जांच के दौरान ईडी को जौहर ट्रस्ट को कथित तौर पर बड़ी रकम दान देने वाले अन्य कारोबारियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी मिली है। एजेंसी इन कारोबारियों से पूछताछ कर संबंधित दस्तावेज जुटाने की तैयारी में है।
इसी मामले में नोएडा के एक कारोबारी की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जल निगम के प्रचार ठेके की भी जांच
ईडी ने जल निगम (ग्रामीण) के प्रचार से जुड़े ठेके की जांच भी तेज कर दी है। एजेंसी कथित तौर पर पांच फर्मों के माध्यम से जल निगम का प्रचार ठेका हासिल करने वाले आफताब से जुड़े लेनदेन की पड़ताल कर रही है। इस सिलसिले में ईडी ने जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक से आवश्यक दस्तावेज भी मांगे हैं।
जौहर ट्रस्ट को दिए गए कथित चंदे और जल निगम के प्रचार ठेके से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के जरिए ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं इन मामलों में धन के स्रोत को छिपाने या अवैध धन को वैध दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई। अभी जांच जारी है और एजेंसी की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।




