संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक दिन पहले दिए बयान का जवाब दिया। पेजेशकियन ने अपने भाषण में ईरान को आतंकवादी देश बताए जाने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उनका देश खुद आतंकवादी हमलों और सैन्य कार्रवाई का शिकार रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान ने कभी दूसरे देशों पर हमला करने की नीति नहीं अपनाई, बल्कि जब भी उस पर हमला हुआ, उसने अपनी रक्षा की। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया संघर्ष के दौरान आम नागरिकों को निशाना बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद ईरान दबाव के सामने नहीं झुका।

तस्वीरें दिखाकर की भाषण की शुरुआत
पेजेशकियन ने अपने भाषण की शुरुआत कुछ तस्वीरें दिखाते हुए कीं। इनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की तस्वीर के साथ मिनाब स्कूल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें भी शामिल थीं।
उन्होंने कहा कि ये तस्वीरें उन नागरिकों की हैं, जिन्होंने संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाई। पेजेशकियन ने दावा किया कि मिनाब में एक स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में बच्चे और शिक्षक मारे गए।
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाते हुए कहा कि सैन्य कार्रवाई के दौरान स्कूल, अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और विश्वविद्यालय जैसे नागरिक ठिकाने भी प्रभावित हुए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों के अलग-अलग दावे रहे हैं।

ट्रंप के बयान का दिया जवाब
इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने या उसके खिलाफ और कठोर कार्रवाई करने के विकल्प मौजूद हैं।
पेजेशकियन ने जवाब देते हुए कहा कि ईरान ने संघर्ष के दौरान अपनी पूरी क्षमता से अपना बचाव किया, लेकिन जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि ईरान पर अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक के जरिए हमले किए गए, लेकिन उनका देश दबाव में नहीं आया।
ईरानी राष्ट्रपति ने इजरायल पर भी नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने गाजा का जिक्र करते हुए वहां बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत का मुद्दा भी उठाया और इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की।
‘धमकी और दबाव में बातचीत नहीं’
पेजेशकियन ने कहा कि ईरान किसी दूसरे देश पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं करना चाहता। उन्होंने दावा किया कि ईरान लंबे समय से शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की बात करता रहा है और उसका उद्देश्य परमाणु हथियार हासिल करना नहीं है।
उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी और दबाव के माहौल में बातचीत स्वीकार नहीं की जा सकती। पेजेशकियन के मुताबिक, उनका देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने छोड़ा हॉल
पेजेशकियन के भाषण के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के महासभा हॉल से बाहर जाने की भी चर्चा रही। यह घटनाक्रम इसलिए खास रहा क्योंकि इससे एक दिन पहले ट्रंप के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी हॉल से बाहर चला गया था।
पेजेशकियन ने अपने भाषण में लगातार इस बात पर जोर दिया कि ईरान खुद को क्षेत्रीय अस्थिरता या आतंकवाद के स्रोत के रूप में नहीं देखता। उन्होंने कहा कि उनका देश शांतिपूर्ण तरीके से स्वतंत्र रूप से रहना चाहता है और किसी भी तरह के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।




