डीजीपी राजीव कृष्ण ने जारी किए निर्देश, साइबर ठगी से लेकर फिरौती और जबरन वसूली के आरोपियों की रिकॉर्डिंग होगी अपलोड
उत्तर प्रदेश पुलिस अपराधियों की पहचान और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। अब साइबर अपराधियों के साथ जबरन वसूली, फिरौती के लिए अपहरण और अन्य गंभीर अपराधों के आरोपियों की आवाज भी पुलिस के ‘यक्ष एप’ पर सुरक्षित की जाएगी। इसके लिए एप में वॉयस रिकॉर्डिंग अपलोड करने की सुविधा शुरू की गई है।
कम से कम 30 सेकंड की रिकॉर्डिंग जरूरी
डीजीपी राजीव कृष्ण की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, साइबर थानों में साइबर अपराध से जुड़े आरोपियों की आवाज अपलोड की जाएगी। वहीं, जिला स्तर के थानों में साइबर अपराधियों के अलावा अन्य गंभीर अपराधों के आरोपियों की रिकॉर्डिंग भी दर्ज की जा सकेगी।
पुलिसकर्मी सीयूजी नंबर के माध्यम से डैशबोर्ड पर लॉगिन कर वॉयस रिकॉर्डिंग का विकल्प चुनेंगे। रिकॉर्डिंग के साथ जरूरी विवरण और टिप्पणी दर्ज करने के बाद उसे सुरक्षित किया जाएगा। साइबर अपराध से जुड़े मामलों में एफआईआर या एनसीआरपी नंबर के आधार पर रिकॉर्डिंग अपलोड करनी होगी।
AI और वॉयस मैचिंग में मिलेगी मदद
पुलिस भविष्य में इन रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल वॉयस सर्च, आवाज के मिलान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विश्लेषण में कर सकेगी। इससे अलग-अलग मामलों में सामने आई आवाजों की तुलना करने और जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
शिकायतकर्ता की आवाज नहीं होगी अपलोड
निर्देशों में रिकॉर्डिंग तैयार करने को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग होने पर उसमें से केवल आरोपी की आवाज निकालकर कम से कम 30 सेकंड की स्पष्ट क्लिप तैयार की जाएगी। शिकायतकर्ता की आवाज किसी भी स्थिति में एप पर अपलोड नहीं की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था से अपराधियों की पहचान करने, संदिग्ध आवाजों का विश्लेषण करने और गंभीर मामलों की जांच में तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है।




