मॉस्को, 26 अगस्त (आईपीएन)। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत और रूस के बीच दशकों पुराने संबंधों को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की रूस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक सहयोग को नई गति देने के साथ-साथ द्विपक्षीय साझेदारी के लिए आगे की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की।
दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान डॉ. जयशंकर ने मॉस्को स्थित क्रेमलिन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश और शुभकामनाएं राष्ट्रपति पुतिन तक पहुंचाईं। बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता और आर्थिक सहयोग की प्रगति पर चर्चा हुई।
लावरोव के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता
विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ भी विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। इसमें क्षेत्रीय स्थिरता, यूरेशियाई सुरक्षा और विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर भारत-रूस के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक में भी हिस्सा लिया। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा, कनेक्टिविटी, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और मोबिलिटी समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई।
व्यापार और निवेश पर विशेष जोर
बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की 27वीं बैठक बेहद सफल रही। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच व्यापक आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सेक्टर-विशिष्ट लक्ष्यों को प्राथमिकता देने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति जताई है। साथ ही व्यावहारिक बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करने, उद्योग की प्राथमिकताओं के अनुरूप संस्थागत तंत्र को मजबूत करने और नीतिगत प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।
पांच साल में चार गुना से अधिक बढ़ा द्विपक्षीय व्यापार
विदेश मंत्रालय के अनुसार, डॉ. जयशंकर ने बैठक में कहा कि भारत-रूस साझेदारी ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच मजबूती और अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि जटिल अंतरराष्ट्रीय माहौल के बावजूद दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार गहरा हुआ है।
जयशंकर ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार चार गुना से अधिक बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में जहां यह करीब 13 अरब डॉलर था, वहीं 2025-26 में बढ़कर लगभग 60 अरब डॉलर पहुंच गया है।
हालांकि व्यापार में तेजी के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन भी बढ़ा है। यह असंतुलन करीब 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। विदेश मंत्री ने इसे मौजूदा समय की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक बताया।
2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और रूस ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, भुगतान तंत्र को मजबूत करने और दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच संबंधों को और बढ़ाने पर जोर दिया गया।
भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग, अंतरिक्ष, विज्ञान एवं तकनीक तथा व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से व्यापक सहयोग रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच दोनों देशों का जोर अब पारंपरिक सहयोग के साथ-साथ आर्थिक संबंधों को अधिक संतुलित, व्यापक और परिणामोन्मुख बनाने पर है।




