‘2017 से पहले बनाम 2017 के बाद’ अभियान पर रहेगा जोर, छह संगठनात्मक क्षेत्रों में मेगा रैलियों और घर-घर संपर्क की तैयारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण के जवाब में भाजपा चुनावी विमर्श को विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर केंद्रित करने की तैयारी में है। पार्टी की रणनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को प्रमुखता देने की बात सामने आई है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के प्रचार अभियान का एक प्रमुख आधार ‘2017 से पहले बनाम 2017 के बाद’ की तुलना होगी। इसके जरिए पार्टी पिछली सपा सरकार के कार्यकाल और मौजूदा सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, सड़क और बुनियादी ढांचे में हुए बदलावों को मतदाताओं के सामने रखने की तैयारी कर रही है।
सपा शासनकाल के विवादित मुद्दे फिर उठाने की तैयारी
भाजपा अपने चुनाव प्रचार में सपा सरकार के पुराने कार्यकाल से जुड़े कुछ विवादित मामलों को फिर से उठाने की योजना बना रही है। इनमें 1995 का स्टेट गेस्ट हाउस कांड, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे, अवैध खनन और माफिया को कथित राजनीतिक संरक्षण जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं।
पार्टी इन मुद्दों के जरिए योगी सरकार की अपराध के खिलाफ घोषित ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और पिछली सरकारों के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति के बीच अंतर बताने की कोशिश करेगी। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, पुलिसिंग और बिजली आपूर्ति को भी चुनावी प्रचार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
छह संगठनात्मक क्षेत्रों में होंगी मेगा रैलियां
चुनावी रणनीति को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए भाजपा ने छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बड़ी जनसभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों की योजना बनाई है। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज, रुहेलखंड, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल शामिल हैं।
इन कार्यक्रमों में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तथा विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड पेश करने की तैयारी है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, नए हवाई अड्डे, बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं और औद्योगिक निवेश जैसे विषयों को प्रमुखता दी जाएगी।
सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों पर भी नजर
भाजपा की रणनीति में विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधा संपर्क बनाने पर जोर है। पार्टी का मानना है कि मुफ्त राशन, पीएम-किसान सम्मान निधि और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले लोगों से संवाद चुनावी अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
किसानों के बीच पीएम-किसान की किस्तों और गन्ना भुगतान का मुद्दा उठाया जा सकता है। वहीं, युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और रोजगार के अवसर तथा महिलाओं के लिए सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को प्रचार में शामिल करने की तैयारी है।
बूथ स्तर पर सक्रिय होंगे पन्ना प्रमुख
भाजपा बड़े आयोजनों के साथ संगठनात्मक स्तर पर भी चुनावी तैयारी मजबूत करना चाहती है। इसके तहत बूथ समितियों और पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क तथा मतदाताओं से फीडबैक जुटाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
प्रदेश नेतृत्व को सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर देने को कहा गया है। पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों और गुटबाजी को दूर कर सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतारना भी रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
PDA के जवाब में व्यापक सामाजिक संपर्क की रणनीति
भाजपा की योजना जातीय समीकरणों के बजाय विभिन्न वर्गों के लाभार्थियों और मतदाताओं तक विकास तथा सरकारी योजनाओं के आधार पर पहुंच बनाने की है। पार्टी किसान, महिला, युवा, दलित और पिछड़े वर्गों के बीच संपर्क बढ़ाने पर ध्यान दे सकती है।
फिलहाल ये रणनीतिक तैयारियां और संभावित चुनावी मुद्दे हैं। भाजपा के औपचारिक प्रचार कार्यक्रम और उम्मीदवारों से जुड़ी घोषणाएं आगे पार्टी नेतृत्व के फैसलों के बाद स्पष्ट होंगी।




