डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले नेटवर्क का खुलासा, फ्लैटों में चल रहा था अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज; पुलिस ने वीपीएन गेटवे समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण किए जब्त
लखनऊ। डिजिटल अरेस्ट और संगठित साइबर ठगी के नेटवर्क के खिलाफ लखनऊ पुलिस ने ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’ के तहत कार्रवाई की है। क्राइम ब्रांच और साइबर थाना की संयुक्त टीमों ने शहर के चार अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर छह अवैध 32-पोर्ट सिम बॉक्स, 192 सिम स्लॉट, तीन वीपीएन गेटवे और बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, इन उपकरणों के जरिए इंटरनेट कॉल को सामान्य मोबाइल कॉल में बदलकर लोगों को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर डराने और ठगी करने की साजिश रची जा रही थी।

चार इलाकों में एक साथ छापेमारी
पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस, संदिग्ध मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शनों की जांच के बाद 31 अक्टूबर को चार ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। ये ठिकाने स्वाति अपार्टमेंट (सुशांत गोल्फ सिटी), आशीर्वाद बिल्डिंग (आदर्श विहार, पारा), गोल्ड लाइन अपार्टमेंट (बीबीडी) और जीजे पैराडाइज (आदर्श नगर, चिनहट) में स्थित थे।
छापेमारी के दौरान फ्लैटों के भीतर मिनी टेलीकॉम एक्सचेंज जैसा सेटअप मिला। पुलिस ने मौके से उपकरणों को कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है।
सिम बॉक्स के जरिए छिपाई जा रही थी पहचान
कार्रवाई में छह 32-पोर्ट सिम बॉक्स बरामद हुए, जिनमें कुल 192 सिम स्लॉट हैं। इसके अलावा तीन वीपीएन गेटवे, 21 स्मार्ट स्विच, तीन स्मार्ट हब, चार इनवर्टर या यूपीएस, 18 बैटरियां और एक लॉक टैबलेट भी मिला है। पुलिस को वाई-फाई और नेटवर्क राउटर, कैमरे समेत अन्य सहायक उपकरण भी बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, 32-पोर्ट सिम बॉक्स में एक साथ कई सिम कार्ड सक्रिय किए जा सकते हैं। साइबर अपराधी इंटरनेट आधारित कॉलिंग (VoIP) को इन उपकरणों के माध्यम से स्थानीय जीएसएम कॉल में बदल सकते हैं। इससे कॉल प्राप्त करने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर सामान्य भारतीय नंबर दिखाई देता है, जबकि कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान और लोकेशन छिप सकती है।
फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को डराने का आरोप
पुलिस का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल कर साइबर ठग खुद को सीबीआई, पुलिस या अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती थी।
साइबर क्राइम की नोडल अधिकारी एवं एडीसीपी किरन यादव के मुताबिक, इस तरह के उपकरणों के जरिए बड़े स्तर पर साइबर ठगी को अंजाम देने की योजना बनाई जा रही थी। उन्होंने बताया कि बरामद उपकरणों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
मास्टरमाइंड और नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
इस मामले में साइबर थाना लखनऊ में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फॉरेंसिक और तकनीकी टीमें बरामद डिजिटल उपकरणों, सिम कार्डों के एक्टिवेशन डाटा और कॉलिंग पैटर्न का विश्लेषण कर रही हैं।
जांच का उद्देश्य इस नेटवर्क के संचालनकर्ताओं, कथित मास्टरमाइंड और इसमें मदद करने वाले अन्य लोगों तक पहुंचना है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि बरामद सिम बॉक्स के जरिए किन-किन नंबरों पर कॉल की गईं और इस नेटवर्क का इस्तेमाल कितने लोगों को निशाना बनाने के लिए किया गया।




