सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीप जलाने की तैयारी, सात नवंबर को होगा भव्य आयोजन; धनुष भंग से लेकर राम-भरत मिलाप तक की दिखेगी झलक
अयोध्या। रामनगरी में इस बार दीपोत्सव का नजारा पहले से अलग और खास होने जा रहा है। शहर के प्रवेश द्वारों से लेकर राम की पैड़ी तक श्रद्धालुओं का स्वागत रामायण के प्रमुख प्रसंगों पर आधारित कलाकृतियों से होगा। कहीं भगवान श्रीराम का धनुष भंग और राम-सीता विवाह दिखाई देगा तो कहीं शबरी की भक्ति, राम-भरत मिलाप और जटायु के प्रति प्रभु श्रीराम का स्नेह जीवंत नजर आएगा। इन प्रसंगों को त्रिआयामी कलाकृतियों के माध्यम से प्रदर्शित करने के लिए 13 थीमेटिक प्रवेश द्वार और 20 सेल्फी प्वाइंट तैयार किए जा रहे हैं।
13 प्रवेश द्वारों पर अंकित होंगी रामायण की चौपाइयां
दीपोत्सव के लिए तैयार किए जा रहे 13 थीमेटिक प्रवेश द्वारों में तीन हाईवे के प्रवेश मार्गों पर और 10 राम की पैड़ी क्षेत्र में स्थापित किए जाएंगे। इन द्वारों पर रामायण की चौपाइयां भी अंकित होंगी। इससे श्रद्धालुओं को आकर्षक सजावट के साथ रामकथा और उसके सांस्कृतिक संदेशों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा 20 सेल्फी प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। इनमें 10 रामकथा मार्ग और 10 लता चौक से राम की पैड़ी तक विकसित किए जाएंगे। इनकी डिजाइन रामायण के सातों कांड और प्रमुख प्रसंगों की अवधारणा पर आधारित होगी।
धनुष भंग से शबरी की भक्ति तक दिखेंगे प्रसंग
सेल्फी प्वाइंट पर रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को कलात्मक रूप दिया जा रहा है। इनमें भगवान श्रीराम का धनुष भंग, राम-सीता विवाह, शबरी की भक्ति, राम-भरत मिलाप और निषादराज से मित्रता जैसे दृश्य शामिल हैं। जटायु के साथ प्रभु श्रीराम के संवाद और हनुमान जी की भक्ति तथा लीलाओं को भी कलाकृतियों के माध्यम से दर्शाया जाएगा।
इन संरचनाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को रामायण की कथा से जोड़ना और दीपोत्सव को धार्मिक-सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करना है।
सरयू के 56 घाटों पर जलेंगे 30 लाख दीप
रामनगरी लगातार दसवें वर्ष भव्य दीपोत्सव की तैयारी कर रही है। सात नवंबर को होने वाले आयोजन में सरयू नदी के 56 घाटों पर 30 लाख दीप सजाने का लक्ष्य रखा गया है। दीपोत्सव के नोडल विभाग डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
दीप बिछाने का काम चार नवंबर से शुरू होकर छह नवंबर की शाम तक पूरा करने की योजना है। सात नवंबर को दीपों में तेल और बाती डालकर उन्हें प्रज्ज्वलित किया जाएगा। इसके लिए बुधवार सुबह आठ बजे विश्वविद्यालय परिसर से 25 बसों में स्वयंसेवकों की टीमें निर्धारित घाटों के लिए रवाना होंगी।
स्वयंसेवकों के लिए तय किए गए रूट और समय
दीपोत्सव की तैयारियों में विश्वविद्यालय के स्वयंसेवकों की अहम भूमिका रहेगी। यातायात समिति के समन्वयक प्रो. अनूप कुमार के अनुसार, सभी 25 बसों के लिए अलग-अलग रूट और समय-सारिणी निर्धारित की गई है। इससे स्वयंसेवक सुरक्षित और समय पर अपने निर्धारित घाटों तक पहुंच सकेंगे और दीप सजाने का काम व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
इस बार मशालों से बनेगी भगवान श्रीराम की आकृति
दीपोत्सव में इस बार एक नया आकर्षण भी देखने को मिलेगा। अवध विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुसार, पहले दीपों के माध्यम से भगवान श्रीराम की आकृति बनाई जाती थी, लेकिन इस बार विद्यार्थी मशालों से उनकी आकृति तैयार करेंगे। इससे आयोजन में एक नया दृश्य आकर्षण जुड़ने की उम्मीद है।
मुख्य अतिथि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
दीपोत्सव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने को लेकर संशय बना हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को आयोजन की तैयारियों और संभावित कार्यक्रम के मद्देनजर अयोध्या का दौरा किया था। इसके बाद मंगलवार शाम प्रशासनिक हलकों में अमित शाह के कार्यक्रम में शामिल न होने की चर्चा सामने आई।
हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, अपुष्ट प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के अयोध्या आने की संभावना जताई जा रही है। अतिथियों की अंतिम स्थिति आधिकारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस बार दीपों की रोशनी के साथ रामायण के प्रसंग, कलात्मक प्रवेश द्वार और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीपोत्सव को विशेष रूप देने की तैयारी में हैं।




