संभल: सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 के तहत निवारक हिरासत को रद्द कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया, जिसमें अफरोज की हिरासत को बरकरार रखा गया था। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पुलिस हिरासत में कथित कबूलनामा अकेला आधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत में आरोपी द्वारा दिए गए कथित कबूलनामे को अपने आप में NSA के तहत निवारक हिरासत का पर्याप्त आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि हिरासत का आदेश जारी करते समय संबंधित अधिकारी को मामले से जुड़ी अन्य परिस्थितियों और उपलब्ध सामग्री पर भी विचार करना जरूरी है।
हाईकोर्ट के आदेश को किया रद्द
मुल्ला अफरोज को संभल हिंसा के मामले में जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में 13 अक्टूबर 2025 को उनके खिलाफ NSA के तहत हिरासत आदेश जारी किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2026 में इस हिरासत को बरकरार रखा था। इसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने अब हाईकोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया है।
नवंबर 2024 की हिंसा से जुड़ा है मामला
संभल में नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के न्यायालय के आदेश पर हुए सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी। घटना में चार लोगों की मौत हुई थी। पुलिस ने मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया था और अफरोज पर भी हिंसा में भूमिका होने का आरोप लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा फैसला NSA के तहत निवारक हिरासत की वैधता से संबंधित है। यह फैसला अपने आप में संभल हिंसा से जुड़े अन्य आपराधिक आरोपों का अंतिम निपटारा नहीं करता।




