हरदोई। गोमती और सरायन नदियों के उफान से अतरौली और भरावन विकासखंड क्षेत्र में बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जबकि शिवपुरी और तुलसीपुर क्षेत्र के 106 परिवार घर छोड़कर सड़क किनारे तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं। बाढ़ के पानी से 40 से अधिक कच्चे मकान ढह चुके हैं और हजारों बीघे में खड़ी फसलें जलमग्न होकर बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं।
शिवपुरी, तुलसीपुर, कूड़ा, तेरवा, भटपुर, रामपुर, लक्ष्मणपुर, भटपुर कटका, भम्भुआ, कटका कटकी, देवरी, रसुलवा, वृंदावन, पिपरी, महसुआ, भोलाखेड़ा, डालखेड़ा, देवकली, औना, गौड़ी और गोकुला समेत करीब 30 गांवों में बाढ़ का पानी भर गया है। मुख्य मार्गों और संपर्क रास्तों के डूबने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। नावों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने-ले जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सरकारी भवन और स्कूल भी जलमग्न
बाढ़ का पानी पीएचसी भटपुर, पंचायत भवन, होम्योपैथिक अस्पताल, एएनएम सेंटर, कंपोजिट स्कूल कटका, सामुदायिक शौचालय, प्राथमिक विद्यालय कूड़ा और गौशाला तक पहुंच गया है। इससे स्वास्थ्य एवं अन्य सरकारी सेवाएं प्रभावित हैं, वहीं स्कूलों में पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई भी ठप हो गई है।
भटपुर पंचायत क्षेत्र में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों के आधार पर फसलों और अन्य नुकसान का सटीक आकलन करने में अधिकारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि कानूनगो रावेन्द्र सिंह और लेखपाल संतोष द्विवेदी ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर किसानों को सरकारी सहायता दिलाने का भरोसा दिया है।
हजारों बीघे फसलें पानी में डूबीं
ग्रामीणों के मुताबिक 25 से 32 हजार बीघे से अधिक क्षेत्र में लगी धान, उड़द और गन्ने की फसलें बाढ़ के पानी में डूब चुकी हैं। खेतों में कई दिनों से पानी भरा होने के कारण फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका है। वहीं घरों से विस्थापित परिवारों के सामने खाद्य सामग्री, पेयजल और पशुओं के चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए भाजपा नेता पंकज शुक्ला ने सड़क किनारे शरण लिए 237 ग्रामीणों को राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
अधिकारियों ने नावों की व्यवस्था का किया दावा
बीडीओ अरविंद राजपूत ने बताया कि प्रभावित गांवों में नावों की व्यवस्था कर दी गई है। बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी लगातार उच्चाधिकारियों को दी जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और स्थिति पर नजर रखने का दावा किया गया है।




