यमुना एक्सप्रेसवे हादसे में नौ यात्रियों की मौत के बाद फिर उठे सवाल, इमरजेंसी गेट ब्लॉक करने और बसों की बॉडी में बदलाव से बढ़ रहा खतरा
लखनऊ। यमुना एक्सप्रेसवे पर ग्रेटर नोएडा के पास बुधवार देर रात डबल डेकर स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने एक बार फिर लंबी दूरी की स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में नौ यात्रियों की जलकर मौत हो गई, जबकि कई यात्रियों ने बस से कूदकर अपनी जान बचाई। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमों ने भी कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे में मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए गए हैं।
बसों के स्वरूप में बदलाव बन रहा खतरा
स्लीपर बसों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। परिवहन विभाग की जांच में कई ऐसी निजी स्लीपर बसें भी मिली हैं, जिनमें कंपनी से निर्मित मूल बॉडी और मौजूदा बस की लंबाई में अंतर पाया गया। कई बसों में इमरजेंसी गेट की जगह सीट लगा दी गई थी या आपात निकास को इस तरह ब्लॉक किया गया था कि जरूरत पड़ने पर यात्रियों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक, बस संचालक अधिक यात्रियों को बैठाने के लिए कई बार बस के मूल डिजाइन में बदलाव कर देते हैं। अतिरिक्त सीट, कुशन और स्लीपर बर्थ लगाए जाने से इमरजेंसी एग्जिट बाधित हो जाता है। आग लगने की स्थिति में कुछ ही मिनटों में पूरी बस धुएं और आग की चपेट में आ सकती है।
परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों ने प्रदेश में निजी स्लीपर बसों की जांच के दौरान ऐसी खामियां पकड़ी थीं। कई बस मालिकों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई और मानकों का पालन करने की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद बसों के स्वरूप में अनधिकृत बदलाव किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं।
लगातार सामने आ रहे हैं हादसे
स्लीपर और डबल डेकर बसों में आग की घटनाएं पिछले कुछ समय में कई बार सामने आई हैं।
- 22 जनवरी 2026: मथुरा के राय थाना क्षेत्र में एक निजी स्लीपर बस में आग लग गई थी। हादसे में कई यात्री प्रभावित हुए, हालांकि किसी की मौत नहीं हुई थी।
- 16 दिसंबर 2025: यमुना एक्सप्रेसवे पर एक रोडवेज बस और तीन निजी बसों की टक्कर के बाद आग लग गई थी। हादसे में 19 यात्रियों की मौत हुई थी।
- 15 मई 2025: बिहार के बेगूसराय से बागपत जा रही डबल डेकर स्लीपर बस में मोहनलालगंज के पास आग लग गई थी। बस में करीब 70 यात्री सवार थे। इमरजेंसी गेट नहीं खुल पाने और चालक की सीट के पास अतिरिक्त सीट होने के कारण पांच यात्री बस से बाहर नहीं निकल सके थे।
- 15 फरवरी 2025: फिरोजाबाद में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर महाकुंभ से लौट रही श्रद्धालुओं से भरी बस में आग लग गई थी। हादसे में एक यात्री की मौत हुई थी।
- 19 जनवरी 2025: उन्नाव के बांगरमऊ क्षेत्र में रायबरेली से राजस्थान जा रही डबल डेकर बस में आग लग गई थी। बस में करीब 50 यात्री सवार थे, जिन्हें समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
लंबी दूरी और रात की यात्रा में ड्राइवरों पर भी दबाव
स्लीपर बसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रेलवे में रिजर्वेशन की कमी के चलते लंबी दूरी की यात्रा के लिए यात्री इन बसों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बिहार-दिल्ली, लखनऊ-सूरत, लखनऊ-बेंगलुरु और जयपुर जैसे लंबे रूट पर ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली स्लीपर बसें बड़ी संख्या में चल रही हैं।
लंबी दूरी और रातभर बस चलने के कारण चालक पर भी लगातार दबाव रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे रूट पर दो चालकों की व्यवस्था होने से दोनों को पर्याप्त आराम मिल सकता है और थकान के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
हाईटेक बसें, लेकिन आपात स्थिति में निकासी चुनौती
लखनऊ जोन के आरटीओ (प्रवर्तन) प्रभात पांडेय के अनुसार, आधुनिक स्लीपर बसों में हाइड्रोलिक लॉक वाले दरवाजे, बंद खिड़कियां और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं। आग लगने की स्थिति में शॉर्ट सर्किट या टायर के घर्षण जैसी वजहों से शुरू हुई छोटी आग भी बस के इंटीरियर में मौजूद कुशन, गद्दे और सीटों के कारण तेजी से फैल सकती है।
उन्होंने बताया कि कई बसों में खिड़कियों पर आपात स्थिति में शीशा तोड़ने के लिए हैमर की व्यवस्था होती है, लेकिन प्रत्येक खिड़की पर हैमर उपलब्ध होना जरूरी है। आग लगने के बाद बस में धुआं भरने की स्थिति में यात्रियों के पास बाहर निकलने के सीमित रास्ते रह जाते हैं।
इमरजेंसी गेट और फायर एक्सटिंग्विशर सबसे अहम
अधिकारियों के मुताबिक, बसों में इमरजेंसी गेट को किसी भी हालत में ब्लॉक नहीं किया जाना चाहिए। कई बसों में अतिरिक्त सीट या अन्य सामान रखकर आपात निकास को बाधित कर दिया जाता है। दुर्घटना या आग की स्थिति में यही लापरवाही यात्रियों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
फायर एक्सटिंग्विशर की स्थिति भी चिंता का विषय है। कई बार बसों में लगे अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो जाते हैं और उन्हें समय पर रिफिल नहीं कराया जाता। अधिकारियों के अनुसार स्लीपर बसों में पर्याप्त क्षमता वाले फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध रखना और उनका नियमित निरीक्षण जरूरी है।
सुरक्षा मानकों को लेकर जारी किए गए निर्देश
परिवहन विभाग की ओर से स्लीपर बसों की सुरक्षा के लिए कई निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- स्लीपर कोच में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) लगाने का प्रावधान।
- बसों में 10 किलोग्राम क्षमता वाले फायर एक्सटिंग्विशर की व्यवस्था।
- मानकों के विपरीत बढ़ाई गई बस बॉडी वाली बसों को संचालन से हटाना।
- चालक के लिए बनाए गए अलग कैबिन को हटाना।
- स्लीपर बर्थ में लगे मानक के विपरीत स्लाइडर को हटाना।
- पंजीयन के समय बस का ले-आउट मैप उपलब्ध कराना, जिसमें बस की माप, दरवाजों की स्थिति, आपात निकास और रूफ हैच की जानकारी हो।
- बस बॉडी के पंजीयन के समय बॉडी निर्माता की Accreditation की वैधता की जांच करना।
लगातार हो रहे हादसों ने साफ कर दिया है कि स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा केवल कागजी मानकों तक सीमित नहीं रह सकती। बस की बॉडी, इमरजेंसी गेट, अग्निशमन उपकरण और चालक की ड्यूटी व्यवस्था की नियमित जांच ही ऐसे हादसों के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।




