नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद शुक्रवार को और तेज हो गया। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन और मार्च निकाले। पार्टी ने कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई तथा SIR के दौरान लिए गए फैसलों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।
कांग्रेस के मुताबिक, पार्टी की सभी जिला कांग्रेस समितियां 28 सितंबर को अपने-अपने जिला मुख्यालयों तक विरोध मार्च निकालेंगी। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती। कांग्रेस नेताओं ने SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता नामों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
कोलकाता में पुलिस ने रोकी रैली
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में कोलकाता में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली। मार्च कॉलेज स्ट्रीट से राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्ट्रैंड रोड स्थित कार्यालय की ओर बढ़ रहा था। पुलिस ने बी.बी. गांगुली स्ट्रीट चौराहे के पास प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
दिल्ली से चंडीगढ़ और पटना तक प्रदर्शन
दिल्ली में इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए पोस्टर और बैनर लगाए। चंडीगढ़ में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
पटना में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। वहीं, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बैनर लहराते हुए विरोध दर्ज कराया। देश के कई अन्य हिस्सों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
दो निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा उठा
प्रदर्शन के बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट भी चर्चा में रही। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि ये आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और चुनावी डेटाबेस तक पहुंच समेत कई मुद्दों से जुड़ी थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कुछ कदमों को अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना उठाए जाने पर सवाल दर्ज किए। इन दावों को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से भी पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण है।
SIR में 13 करोड़ नामों का मुद्दा
कांग्रेस नेताओं ने SIR के तहत करीब 13 करोड़ नामों के प्रभावित होने का दावा करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। हालांकि, यह संख्या और इसके आधार पर लगाए गए आरोप राजनीतिक विवाद का विषय हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से पश्चिम बंगाल के संदर्भ में कहा गया है कि हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाता शामिल हो सकते हैं तथा प्रभावित मतदाताओं के लिए अपील की प्रक्रिया मौजूद है।
पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी SIR को लेकर उठे आरोपों की स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई है। इस बीच कांग्रेस ने कहा है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष और स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए।




